Ayodhya Ram Mandir Heatwave : धार्मिक नगरी अयोध्या में इन दिनों सूरज के कड़े तेवर और भीषण लू का कहर देखने को मिल रहा है। तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर पहुंच जाने के कारण राम मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या में अप्रत्याशित कमी आई है। मंदिर प्रशासन और नगर निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, श्रद्धालुओं की आवक में 60 प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन एक लाख से अधिक भक्त रामलला के चरणों में शीश नवाने पहुंचते थे, वहीं अब चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के कारण यह संख्या घटकर 40,000 से भी कम रह गई है। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन को भक्तों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति अधिक सतर्क कर दिया है।
भक्तों को राहत देने के लिए नगर निगम और ट्रस्ट के विशेष इंतजाम
श्रद्धालुओं को इस प्रचंड गर्मी से बचाने के लिए अयोध्या नगर निगम ने मोर्चा संभाल लिया है। अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी के मुताबिक, मुख्य मार्गों और राम पथ जैसे व्यस्त क्षेत्रों में स्प्रिंकलर मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। ये मशीनें हवा में पानी की महीन बूंदों का छिड़काव करती हैं, जिससे वातावरण के तापमान में गिरावट आती है और पैदल चलने वाले यात्रियों को कुछ राहत मिलती है। इसके साथ ही, राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने जानकारी दी कि मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक वातानुकूलित (AC) प्रतीक्षालय का निर्माण किया गया है। लगभग तीन हजार लोगों की क्षमता वाला यह हॉल भक्तों को दर्शन के इंतजार के दौरान भीषण गर्मी से बचाएगा।
रामलला के खान-पान और भोग में ग्रीष्मकालीन बदलाव
गर्मी का प्रभाव केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं, बल्कि मंदिर की सेवा-पद्धति पर भी पड़ा है। भगवान रामलला को गर्मी से राहत दिलाने के लिए उनके दैनिक ‘भोग’ में व्यापक बदलाव किए गए हैं। अब प्रभु को शीतल पेय पदार्थ जैसे लस्सी और ताजे फलों का रस नियमित रूप से अर्पित किया जा रहा है। विशेष रूप से आम के रस का भोग रोजाना लगाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक अनुष्ठानों के तहत सोने के पात्र में शहद, शुद्ध दही, घी और शीतल जल का एक विशेष मिश्रण तैयार कर अर्पित किया जा रहा है। ये सभी परिवर्तन सात्विक परंपराओं के अनुसार भगवान को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
गर्भगृह में ठंडक के उपाय और भगवान का विशेष श्रृंगार
भगवान की प्रतिमा को गर्मी से बचाने के लिए गर्भगृह के भीतर भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह में उच्च क्षमता वाले कूलर लगाए हैं ताकि अंदर का तापमान सुखद बना रहे। वस्त्र चयन में भी ऋतु अनुकूल बदलाव किए गए हैं; अब रामलला को भारी रेशमी वस्त्रों के स्थान पर अत्यंत हल्के सूती और बारीक रेशमी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं, जो शरीर को ठंडक देते हैं। इसके साथ ही, भगवान को अब दिन में कई बार ठंडे जल से स्नान कराया जा रहा है। दैनिक पूजा और अनुष्ठानों की समय-सारणी में भी आंशिक संशोधन किया गया है ताकि दोपहर की तपिश के दौरान भगवान को अधिक विश्राम मिल सके।
दर्शन मार्ग पर बिछाई गई जूट की चटाइयां और छाया की व्यवस्था
पैदल चलने वाले भक्तों के पैरों को जलने से बचाने के लिए राम जन्मभूमि परिसर और उसके पहुंच मार्गों पर जूट की विशेष चटाइयां बिछाई गई हैं, जिन पर लगातार पानी का छिड़काव किया जाता है। जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था और ओआरएस (ORS) के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि डिहाइड्रेशन की समस्या न हो। मंदिर ट्रस्ट ने अपील की है कि बुजुर्ग और बच्चे दर्शन के लिए सुबह जल्दी या शाम के समय को प्राथमिकता दें। इन व्यापक प्रबंधों के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि इस भीषण मौसम में भी भक्तों की आस्था और उनकी सुविधा के बीच कोई बाधा न आए।
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