Ayodhya Ram Mandir: दान के नाम पर धोखा, राम मंदिर में फर्जी रसीदों का खेल उजागर

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में एसआईटी (SIT) को बड़ी कामयाबी मिली है। आरोपियों की निशानदेही पर 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के नाम से छपी फर्जी रसीद बुक बरामद की गई हैं।

Ayodhya Ram Mandir

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 8, 2026

Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी और घोटाला मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस हिरासत में चल रहे आरोपियों की निशानदेही पर ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के नाम से छपी पुरानी फर्जी रसीद बुक (Fake Receipt Books) बरामद की गई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह चौंकाने वाला सच कबूल किया है कि वे न केवल मंदिर के चढ़ावे की चोरी करते थे, बल्कि अयोध्या आने वाले भोले-भले श्रद्धालुओं को ये नकली रसीदें थमाकर उनसे चंदे के नाम पर मोटी रकम भी वसूल रहे थे। इस नए खुलासे के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ गया है।

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ट्रस्ट ने बदले सुरक्षा नियम

फर्जी रसीद के जरिए चंदा वसूली के इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर परिसर और दान प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है। प्रशासनिक स्तर पर कई कड़े कदम उठाए गए हैं:

बैंक खातों के लिए नई व्यवस्था: ट्रस्ट के बैंक खातों के संचालन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए अब संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signature) व्यवस्था लागू की गई है।

सीसीटीवी कैमरों की निगरानी: दान और चढ़ावे की गिनती करने वाले मुख्य गणना स्थल (Counting Station) पर अतिरिक्त आधुनिक सीसीटीवी कैमरे और कड़े सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।

इसी बीच, ट्रस्ट के पूर्व आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जुड़े संदिग्ध पहलुओं की जांच भी तेज कर दी गई है। इन सबके बीच आज गोपाल गिरी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात की। एसआईटी को लिखे गए एक गोपनीय पत्र के बाद चंपत राय और गोपाल गिरी की इस मुलाकात को बेहद संवेदनशील और अहम माना जा रहा है।

यूपी चुनाव से पहले बीजेपी और आरएसएस का डैमेज कंट्रोल

राम मंदिर में हुए इस चढ़ावा विवाद ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह से ‘डैमेज कंट्रोल मोड’ में आ गए हैं। विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देने और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं का भरोसा फिर से जीतने के लिए दोनों संगठनों ने एक साझा और बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने की रणनीति तैयार की है।

बीजेपी के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को यह समझाने की जिम्मेदारी दी जाएगी कि सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए तुरंत एसआईटी (SIT) जांच बैठाई और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पार्टी को अंदेशा है कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे को यूपी चुनाव में एक बड़ा चुनावी हथियार बनाने की कोशिश में है।

स्वयंसेवक करेंगे दानदाताओं से संपर्क; आपसी बयानबाजी पर रोक

समानांतर रूप से, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी अपने स्तर पर एक बड़ा अभियान चलाने जा रहा है। इसके तहत संघ के स्वयंसेवक समाज के बड़े दानदाताओं से सीधे संपर्क साधेंगे। जरूरत पड़ने पर वे दानदाताओं को मंदिर ट्रस्ट के पास सुरक्षित रखे गए दान और उसके सदुपयोग की प्रामाणिक जानकारी भी साझा करेंगे।

विवाद को और बढ़ने से रोकने के लिए बीजेपी के प्रदेश संगठन व वरिष्ठ नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के सभी छोटे-बड़े नेताओं को पूरी तरह से एकजुट रहने की हिदायत दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि कोई भी नेता इस विवादित मुद्दे पर मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर आपसी बयानबाजी करने से पूरी तरह बचे। कुल मिलाकर, बीजेपी और संघ का पूरा ध्यान इस समय श्रद्धालुओं के विश्वास को बहाल करने और राजनीतिक नुकसान को समय रहते रोकने पर केंद्रित है।

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