Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की बड़ी कार्रवाई, चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव पर शिकंजा

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला को अर्पित किए गए चढ़ावे और दानराशि की चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) बड़े एक्शन की तैयारी में है। मुख्य संदिग्ध और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव पर ₹50 करोड़ के गबन का आरोप है। एसआईटी आज ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप सकती है।

Ram Mandir Donation Case

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 20, 2026

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला को अर्पित किए गए चढ़ावे और दानराशि की चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में विशेष जांच दल (SIT) बेहद आक्रामक कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है। जांच के केंद्र में आए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अत्यंत करीबी माने जाने वाले राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर शिकंजा कसने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। सूत्रों के मुताबिक, टिन्नू यादव सहित दानराशि की हेराफेरी में संलिप्त कई अन्य मुख्य आरोपियों को किसी भी वक्त सलाखों के पीछे भेजा जा सकता है। एसआईटी इस वित्तीय गबन और आपराधिक साजिश के मामले में टिन्नू यादव, डोनेशन काउंटिंग (दान की गिनती) विभाग के प्रभारियों और कुछ चुनिंदा निजी व सरकारी बैंक के कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का नया मुकदमा दर्ज कर उन्हें हिरासत में लेने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।

ट्रस्ट के लापरवाह पदाधिकारियों पर गिर सकती है गाज

इस महा-घोटाले और चढ़ावे की चोरी ने राम मंदिर प्रशासन की सुरक्षा और पारदर्शिता व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि जिन बड़े पदाधिकारियों और न्यास के सदस्यों की घोर लापरवाही, ढुलमुल रवैये और अपर्याप्त निगरानी के कारण इतनी बड़ी चोरी की वारदात संभव हो सकी, उन्हें जल्द ही राम मंदिर ट्रस्ट से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इस सनसनीखेज मामले की जांच का आज छठा दिन है और सरकार द्वारा दिए गए विधिक आदेश के मुताबिक एसआईटी को 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपनी है। जांच टीम आज ही लखनऊ वापस लौटकर सीएम योगी को अपनी विस्तृत शुरुआती रिपोर्ट सौंप सकती है, जिसके बाद शासन स्तर पर बड़े प्रशासनिक फेरबदल और दंडात्मक फैसलों की उम्मीद जताई जा रही है।

टिन्नू यादव पर मंदिर फंड से ₹50 करोड़ के गबन का संगीन आरोप

राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पूरे दानराशि घोटाले और चढ़ावे की हेराफेरी का मुख्य संदिग्ध बनकर उभरा है। उस पर बेहद गंभीर आरोप हैं कि उसने एक आलीशान बंगला और अभेद्य व्यक्तिगत साम्राज्य खड़ा करने के लिए प्रभु रामलला के पावन मंदिर फंड से अवैध रूप से करीब 50 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि का गबन किया है। इस पूरे आपराधिक मामले ने उस समय और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के राम मंदिर क्षेत्र ट्रस्ट के कद्दावर महासचिव चंपत राय के साथ बेहद करीबी और रणनीतिक संबंधों का पर्दाफाश हुआ। शुक्रवार को अपनी जांच के पांचवें दिन, विशेष जांच दल (SIT) के आला अधिकारियों ने टिन्नू यादव को तलब कर कई घंटों तक तीखे सवालों की बौछार की थी, जिसमें उसने कई अहम राज उगले हैं।

सोने-चांदी के आभूषणों और सरकारी दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी

विशेष जांच दल इस वित्तीय विसंगति की जड़ तक पहुंचने के लिए अब तक मंदिर परिसर के 10 से अधिक मुख्य सेवादारों, वित्तीय प्रबंधकों और डोनेशन रूम से जुड़े संबंधित कर्मचारियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुका है। एसआईटी के वित्तीय विशेषज्ञों की टीम रामलला को देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए बेशकीमती सोने-चांदी के गहनों, हीरों और आभूषणों के भौतिक स्टॉक तथा उनसे जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों की बहुत बारीकी से स्क्रूटनी (जांच) कर रही है। जांचकर्ता मंदिर के लॉकरों में मौजूद आभूषणों की वास्तविक मात्रा और उनके कागजी रिकॉर्ड के बीच के भारी अंतर को खंगाल रहे हैं। इसी वित्तीय विसंगति और स्टॉक मिसमैच के ठोस प्रमाणों के आधार पर एसआईटी गबन के वास्तविक पैमाने और सटीक रकम का अंतिम निष्कर्ष निकालेगी, जिसके बाद आरोपियों पर मकोका या गैंगस्टर एक्ट जैसी कठोर धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।