Ram Mandir Donation: राम मंदिर के दान में हुआ करोड़ों का घोटाला? SIT जांच में बड़े नामों का पर्दाफाश

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और कमीशनखोरी मामले में एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा किया गया है। सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर अब एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है, जो मंदिर प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

Ram Mandir Donation

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 24, 2026

Ram Mandir Donation: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी और कमीशनखोरी के सनसनीखेज मामले में एसआईटी (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। इस गोपनीय रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर से लेकर निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी तक के गंभीर आरोप उजागर किए गए हैं। जांच टीम ने मंदिर के कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और दान की गणना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई है। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन की टीम द्वारा तैयार यह रिपोर्ट अब मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएगी, जो पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल

बताते चले कि, एसआईटी की रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम उन लोगों में शामिल है, जो सीधे तौर पर सवालों के घेरे में हैं। रिपोर्ट में इन पदाधिकारियों पर न केवल निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप हैं, बल्कि कुछ के खिलाफ हेरफेर में शामिल होने के संकेत भी मिले हैं। विशेष रूप से अनिल मिश्रा पर निर्माण कार्यों में 40 प्रतिशत तक कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है, जिसकी पुष्टि एक इंजीनियर के बयानों से भी हुई है।

सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के सबूत

जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मंदिर परिसर से रकम चोरी करने में एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के ठोस साक्ष्य जुटाए हैं, जबकि कुछ ऐसे फुटेज भी हाथ लगे हैं जो सीधे तौर पर चोरी की घटना को प्रमाणित करते हैं। गणना में शामिल अनुकल्प, मनीष, अवनीश और टिन्नू यादव जैसे कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे कांड में 25 से 30 लोगों की मिलीभगत है, जिनके खिलाफ एसआईटी ने एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। चंपत राय और गोपाल राव के करीबियों व रिश्तेदारों के नाम भी इस घोटाले में सामने आए हैं।

बैंक अधिकारियों और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता

इस घोटाले के दायरे में केवल ट्रस्ट के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बैंक अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी आ गए हैं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में गणना प्रक्रिया के दौरान बैंक कर्मियों की मिलीभगत और सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगने को बड़ी खामी माना है। मंदिर परिसर से रकम बाहर ले जाने के दौरान वहां तैनात पुलिसकर्मियों को भनक तक न लगना, उनकी कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। संविदाकर्मियों की नियुक्ति में ट्रस्ट की सिफारिशों को प्राथमिकता देना और पूरी गणना प्रक्रिया को बिना पुख्ता निगरानी के छोड़ देना, इस पूरे हेरफेर की नींव साबित हुआ। अब इन सभी पहलुओं पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।