Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में हेरफेर के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने छह दिनों तक अयोध्या में गहन पड़ताल की। इस रिपोर्ट को अपर मुख्य सचिव गृह, संजय प्रसाद को सीलबंद लिफाफे में सौंपा गया है। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित इस टीम ने 15 से 20 जून के बीच घटनास्थल पर पहुंचकर 60 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए।
राम मंदिर दान हेरफेर जांच
प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद से उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह जांच तब शुरू हुई थी जब ट्रस्ट ने खुद सामने आकर दान राशि में कथित चोरी और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया था। रिपोर्ट के सरकार के पास पहुंचने के बाद अब सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट के आधार पर न केवल गबन के मामले में एफआईआर दर्ज की जा सकती है, बल्कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी गाज गिरना भी तय माना जा रहा है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट विवाद
एसआईटी की रिपोर्ट के बाद अब उन नामों की चर्चा तेज हो गई है, जो सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन ट्रस्ट के प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ उनका करीबी संबंध रहा है। आरोप है कि इन्होंने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर मंदिर की व्यवस्था में हस्तक्षेप किया। एसआईटी अब इन बाहरी व्यक्तियों को भी पूछताछ के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि अपनी जांच के दूसरे चरण में टीम फिर से अयोध्या का दौरा करेगी ताकि इन अनैतिक संबंधों की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
मंदिर दान-धातु गबन मामला
जांच के दौरान मामला केवल चढ़ावे की रकम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा और अधिक विस्तृत हो गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की राशि में हेरफेर को प्रमुखता दी गई है, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, दान में दी गई कीमती धातुओं के दुरुपयोग और मंदिर निर्माण में कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। इन नई चुनौतियों ने एसआईटी के कार्यभार को बढ़ा दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस रिपोर्ट पर किस प्रकार का कदम उठाती है और मंदिर की शुचिता को बनाए रखने के लिए क्या ठोस निर्णय लिए जाते हैं।










