Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस पूरे विवाद ने उस वक्त एक नया मोड़ ले लिया, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। मीडिया से बातचीत के दौरान सतीश महाना ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों का दान चोरी होने की बात कही जा रही है, हो सकता है कि उन्होंने पूरी श्रद्धा और सच्ची भावना से भगवान को दान न किया हो। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं पूरी आस्था के साथ मंदिर के लिए दान दिया था और उनका दिया हुआ धन सुरक्षित रूप से मंदिर के निर्माण कार्य में लगा है। उनके इस बयान के सार्वजनिक होते ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी बहस छिड़ गई है।
कांग्रेस का करारा पलटवार
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के इस बयान पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक सिंह ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के इस बयान से अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कुछ न कुछ गंभीर गड़बड़ी जरूर हुई है और इसे लेकर उठ रहे सवाल पूरी तरह जायज हैं। दीपक सिंह ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यदि आस्था के इस केंद्र में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में किसी भी स्तर पर कोई वित्तीय हेराफेरी या हेरफेर हुआ है, तो इसकी एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का विषय है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेता ने उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मांग की है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि अगर जांच के दौरान किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या चंदे की हेराफेरी सामने आती है, तो इसके लिए जिम्मेदार जो भी व्यक्ति या समूह हो, उसके खिलाफ देश के कानून के अनुसार सख्त से सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। दीपक सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मामले की पूरी सच्चाई और पारदर्शिता को जनता के सामने लाने के लिए बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष जांच होना अनिवार्य है। विपक्ष ने सरकार से दोटूक कहा है कि यदि जांच एजेंसियों को कोई भी दोषी मिलता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी देरी के उचित कानूनी कदम उठाए जाएं।
सोशल मीडिया पर छिड़ा युद्ध
सतीश महाना का यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी दो धड़ों में बंट गए हैं। डिजिटल जगत में इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां कुछ लोग विधानसभा अध्यक्ष के तर्क का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं एक बड़ा वर्ग इस बयान को संवेदनहीन बताते हुए इस पर सवाल खड़े कर रहा है। गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े इस कथित घोटाले को लेकर पहले से ही जांच प्रक्रिया चल रही है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के इस नए बयान ने जलती आग में घी का काम किया है और इसे एक नया राजनीतिक रंग दे दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, सरकार के अगले कदम और इस पर विपक्ष के पलटवार के चलते उत्तर प्रदेश की सियासत और गरमाने के पूरे आसार हैं।










