Ram Mandir Donation Scam: ‘आधुनिक रावणों’ को नहीं बख्शेंगे भगवान! धीरेंद्र शास्त्री की कड़ी चेतावनी

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी टिप्पणी करते हुए इसे 'श्रद्धा की चोरी' बताया है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है और करीब 80 लाख रुपये बरामद हुए हैं। मंदिर प्रशासन और सरकार इस पर सख्त हैं, जबकि विपक्ष ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है।

Ram Mandir Donation Scam

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 27, 2026

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और आभूषणों में कथित गबन के मामले ने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस प्रकरण पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसमें शामिल लोगों को आधुनिक युग का ‘रावण’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के दान पात्र में चोरी केवल धन की नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की पवित्र श्रद्धा और विश्वास की चोरी है। शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि ऐसे कृत्य करने वालों को न केवल सरकारी कानून के तहत दंड मिलेगा, बल्कि उन्हें ईश्वर के ‘महादंड’ का भी सामना करना पड़ेगा, जिसका परिणाम सर्वनाश के रूप में होगा।

आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में, लाखों रुपये बरामद

इस मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। शुक्रवार को इस कथित गबन और हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। जांच के दौरान विशेष जांच दल (SIT) ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए आरोपियों के पास से लगभग 79.85 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की है। इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की अफवाहें भी जोर पकड़ने लगी थीं, हालांकि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इन अटकलों से अनभिज्ञता जताई है।

राम मंदिर चंदे के घोटाले पर राजनीतिक घमासान

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक युद्ध में बदल चुका है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, वहीं विपक्ष ने योगी सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ी है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने इसे ‘धर्मयुद्ध’ बताते हुए दोषियों के सामाजिक बहिष्कार की अपील की है। वहीं, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा का ‘लंकाकांड’ करार दिया है। कांग्रेस ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और ट्रस्ट को भंग करने की मांग करके मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

राजनीतिक साजिश या प्रशासनिक चूक?

विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इसे सपा और कांग्रेस की एक सुनियोजित साजिश बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एफआईआर पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई है, जिसे राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई में लाया गया है। सात जून को अनियमितताओं की खबर सामने आते ही योगी सरकार ने SIT का गठन कर दिया था, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। अब जनता की नजरें जांच की निष्पक्षता और इस मामले में शामिल ‘बड़े चेहरों’ की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।