Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर में चोरी के दोषियों पर गिरेगी गाज, सीएम योगी ने दी 15 दिन की मोहलत

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। रामनगरी पहुंचे सीएम ने कहा कि 15 दिनों के भीतर एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट सामने आ जाएगी और दोषी कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान उन्होंने रामभक्तों से मर्यादित रहने और धैर्य रखने की अपील की है।

Ram Mandir Donation Scam

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 20, 2026

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने के गंभीर मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कड़ा रुख अख्तियार किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोग सिर्फ 15 दिनों का धैर्य और रखें, जांच जारी है। उन्होंने कानून का भरोसा दिलाते हुए ऐलान किया कि इस प्रकरण में यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो वह चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ज्ञात हो कि 7 जून को चोरी का मामला सामने आने के बाद 13 जून को विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया गया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री का यह पहला अयोध्या दौरा था।

विपक्षी दलों पर तीखा हमला

बताते चले कि, रामनगरी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें राजनीतिक आईना दिखाया। सीएम ने कहा कि जो लोग कभी प्रभु श्रीराम के ऐतिहासिक अस्तित्व को ही नकारते थे और जिन्होंने निहत्थे रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलवाईं, वे आज इस संवेदनशील मुद्दे पर उपदेश दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस बहाने अयोध्या की पावन छवि को वैश्विक स्तर पर अपमानित करने का कुत्सित और सुनियोजित प्रयास कर रहा है।

अफवाहों पर विराम लगाने और सबूत सौंपने की अपील

मुख्यमंत्री ने मीडिया और आम जनता को संबोधित करते हुए कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिलते ही, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर तत्काल एसआइटी जांच के आदेश दिए गए थे। उन्होंने विश्वास जताया कि विशेष जांच दल की यह तफ्तीश पूरी तरह दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। सीएम योगी ने रामभक्तों से अपील की कि जब तक एसआइटी की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी भी प्रकार की भड़काऊ बयानबाजी से बचें। साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई प्रामाणिक या दस्तावेजी सबूत (Documentary Proof) हो, तो वह सीधे जांच टीम को सौंप सकता है।

मर्यादित आचरण का संदेश

भगवान राम के आदर्शों का स्मरण कराते हुए मुख्यमंत्री ने सभी सनातन धर्मावलंबियों और रामभक्तों से मर्यादित आचरण बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रभु राम के भव्य मंदिर और उनके स्थान की पुनर्स्थापना के लिए पूरी मर्यादा में रहकर 500 वर्षों तक कड़ा संघर्ष किया है। ऐसे में वर्तमान पीढ़ी को केवल 15 दिनों तक धीरज धरने की आवश्यकता है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा तंज

सीएम योगी ने अपने संबोधन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि सपा प्रमुख ने स्वयं तो कभी राम मंदिर के दर्शन नहीं किए, बल्कि अपने दल के विधायकों को भी अयोध्या आने से सख्ती से रोका। मुख्यमंत्री ने मनोज पांडेय का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने तत्कालीन सपा विधायक के रूप में सभी विधायकों को अयोध्या ले जाने का विधिवत प्रस्ताव रखा, तो अखिलेश यादव ने उसे सिरे से ठुकरा दिया और राम का नाम लेने के कारण मनोज पांडेय को अपमानित कर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

विकास परियोजनाओं का उपहार

अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने हमेशा की तरह सबसे पहले हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के चरणों में शीश नवाया और फिर रामलला का विशेष दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने मणिरामदास जी की छावनी में पूज्य महंत नृत्यगोपालदास के 10 दिवसीय जन्मोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अयोध्या के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। सीएम ने वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण किया और परिक्रमा मार्ग पर रामायण के महान पात्रों पर आधारित उत्तर प्रदेश के पहले अनूठे ‘वैक्स म्यूजियम’ (मोम का संग्रहालय) का भी उद्घाटन किया।

प्रशासनिक फेरबदल और दूरियां

इस पूरे दौरे के दौरान राम मंदिर परिसर में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय देखने को मिला। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के आधिकारिक पत्र के प्रोटोकॉल के अनुरूप, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मुख्यमंत्री के स्वागत कार्यक्रम से पूरी तरह दूर दिखे। उनकी जगह ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्रदास ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि चढ़ावा चोरी मामले में चल रही एसआइटी (SIT) की जांच की संवेदनशीलता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए ही महासचिव चंपत राय को जानबूझकर मुख्यमंत्री के इस आधिकारिक कार्यक्रम से दूर रखा गया था।