Shankaracharya Avimukteshwaranand Dispute: उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या से एक चौंकाने वाला प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई विवादित टिप्पणी के विरोध में राज्यकर विभाग (GST) के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेजते हुए स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते।
Avimukteshwaranand Vs CM Yogi: Shankaracharya के टारगेट पर Yogi ? आखिर क्यों है 36 का आंकड़ा ?
राज्यपाल को भेजा दो पन्नों का आधिकारिक त्यागपत्र
प्रशांत कुमार सिंह, जो अयोध्या संभाग में संभागीय उप आयुक्त के पद पर तैनात थे, ने राज्यपाल को भेजे अपने विस्तृत इस्तीफे में गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रदेश के जनप्रिय मुखिया हैं। उनके विरुद्ध की गई अमर्यादित टिप्पणी किसी भी राष्ट्रभक्त नागरिक और निष्ठावान अधिकारी के लिए स्वीकार्य नहीं है।
नेतृत्व के प्रति अटूट निष्ठा और ‘नमक का हक’
अपने पत्र में प्रशांत कुमार सिंह ने भावुक और कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, “मैं जिस प्रदेश का अन्न और नमक खाता हूँ और जहाँ से मुझे जनसेवा हेतु वेतन प्राप्त होता है, उस प्रदेश के नेतृत्व का अपमान सहन करना मेरे सिद्धांतों के विरुद्ध है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्यों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि वे सदैव अपने प्रदेश और उसके यशस्वी नेतृत्व के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे।
शंकराचार्य की टिप्पणी से उपजी मानसिक वेदना
इस्तीफे के मुख्य कारणों पर प्रकाश डालते हुए डिप्टी कमिश्नर ने उल्लेख किया कि शंकराचार्य द्वारा हाल ही में दी गई प्रतिक्रिया से वे पिछले तीन दिनों से अत्यंत मानसिक पीड़ा और तनाव से गुजर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी बाहरी दबाव या राजनीतिक प्रभाव में नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से अपने आत्मसम्मान और अंतरात्मा की आवाज पर लिया गया है। प्रशासनिक गलियारों में उनके इस स्वाभिमानी रुख की व्यापक चर्चा हो रही है।
अयोध्या में कार्यकाल और भविष्य की सामाजिक कार्ययोजना
प्रशांत कुमार सिंह की अयोध्या में पोस्टिंग वर्ष 2023 में हुई थी, जहाँ उन्होंने जीएसटी विभाग के महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। अपने भविष्य के कदमों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्वीकार होने के उपरांत वे किसी सरकारी पद की लालसा के बिना, अपने निजी संसाधनों के माध्यम से समाज सेवा में जुट जाएंगे। उनका लक्ष्य समाज के वंचित वर्गों के लिए काम करना और वैचारिक शुचिता बनाए रखना है।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में बढ़ी सरगर्मी
इस इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शंकराचार्य विवाद अब केवल धार्मिक या जुबानी जंग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने नौकरशाही के भीतर भी वैचारिक ध्रुवीकरण पैदा कर दिया है। आने वाले दिनों में शासन स्तर से इस इस्तीफे पर होने वाली प्रतिक्रिया और संभावित प्रशासनिक फेरबदल पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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