
Ayodhya Deepotsav: रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां अब अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। इस बार दीपोत्सव में श्रद्धालुओं को सिर्फ लाखों दीपों की रोशनी ही नहीं, बल्कि रामायण के प्रमुख प्रसंगों की झलक भी देखने को मिलेगी। शहर में 13 थीमेटिक प्रवेश द्वार और 20 सेल्फी प्वाइंट तैयार किए जा रहे हैं। वहीं, सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीप जलाने की तैयारी है। हालांकि, कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आने को लेकर असमंजस बना हुआ है।
अयोध्या दीपोत्सव में दिखेगी रामायण की झलक
इस बार अयोध्या का दीपोत्सव पहले से ज्यादा खास होने वाला है। शहर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को रामायण की कहानियां और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंग देखने को मिलेंगे। इसके लिए 13 थीमेटिक प्रवेश द्वार तैयार किए जा रहे हैं। इन पर त्रिआयामी यानी 3D कलाकृतियों के जरिए रामायण के अलग-अलग प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा।

इन प्रवेश द्वारों में तीन हाईवे के रास्तों पर बनाए जाएंगे, जबकि दस प्रवेश द्वार राम की पैड़ी क्षेत्र में स्थापित होंगे। खास बात यह है कि इन द्वारों पर रामायण की चौपाइयां भी लिखी जाएंगी। इससे श्रद्धालुओं को सजावट के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश भी मिलेगा।
20 सेल्फी प्वाइंट पर दिखेंगे खास प्रसंग
दीपोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए 20 सेल्फी प्वाइंट भी तैयार किए जा रहे हैं। इनमें दस रामकथा मार्ग पर और दस लता चौक से राम की पैड़ी तक बनाए जाएंगे। इनकी डिजाइन रामायण के सातों कांड और उनसे जुड़े प्रमुख प्रसंगों पर आधारित होगी।इन कलाकृतियों में भगवान श्रीराम का धनुष भंग, राम-सीता विवाह, शबरी की भक्ति, राम-भरत मिलाप और निषादराज के साथ मित्रता जैसे प्रसंग देखने को मिलेंगे। इसके अलावा जटायु के साथ प्रभु श्रीराम का संवाद और हनुमान जी की भक्ति से जुड़ी झलकियां भी दिखाई जाएंगी।
अयोध्या के 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीप

रामनगरी इस बार लगातार दसवें साल भव्य दीपोत्सव मनाने जा रही है। सात नवंबर को होने वाले आयोजन के लिए सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख दीप सजाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चार नवंबर से घाटों पर दीप बिछाने का काम शुरू किया जाएगा। अवध विश्वविद्यालय को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है और विश्वविद्यालय ने भी अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। बुधवार सुबह आठ बजे विश्वविद्यालय परिसर से 25 बसों के जरिए स्वयंसेवकों की पहली टीम दीपोत्सव स्थल के लिए रवाना होगी।
छह नवंबर तक बिछ जाएंगे सभी दीप, स्वयंसेवकों को सौंपी गई जिम्मेदारी
दीपोत्सव के लिए घाटों पर दीप बिछाने का काम चार नवंबर से शुरू होकर छह नवंबर की शाम तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद सात नवंबर को दीपों में तेल और बाती डालकर उन्हें प्रज्ज्वलित किया जाएगा।
इस पूरे आयोजन में विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों की अहम भूमिका रहेगी। यातायात समिति के समन्वयक प्रो. अनूप कुमार के मुताबिक, स्वयंसेवकों को घाटों तक पहुंचाने के लिए 25 बसों के रूट और समय तय कर दिए गए हैं। इससे सभी स्वयंसेवक समय पर अपने निर्धारित स्थानों पर पहुंच सकेंगे और दीप सजाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस बार दीपों की जगह मशालों से बनेगी भगवान श्रीराम की आकृति
दीपोत्सव में इस बार एक नया आकर्षण भी देखने को मिलेगा। पहले विद्यार्थी दीपों के जरिए भगवान श्रीराम की आकृति बनाते थे, लेकिन इस बार मशालों से प्रभु श्रीराम की आकृति तैयार की जाएगी। कुलपति ने बताया कि इस बदलाव से दीपोत्सव में एक नया दृश्य आकर्षण जुड़ेगा। श्रद्धालुओं को रोशनी के बीच भगवान श्रीराम की भव्य आकृति देखने का मौका मिलेगा। अमित शाह का अयोध्या दीपोत्सव कार्यक्रम रद्द होने की चर्चा, उपराष्ट्रपति के आने की संभावना
दीपोत्सव के मुख्य अतिथि को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही थी। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अयोध्या पहुंचकर दीपोत्सव की तैयारियों का जायजा भी लिया था।
हालांकि, मंगलवार शाम प्रशासनिक हलकों में अमित शाह का कार्यक्रम रद्द होने की खबर सामने आने लगी। अपुष्ट प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, अब उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के अयोध्या आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुल मिलाकर इस बार अयोध्या का दीपोत्सव रोशनी, रामायण की झांकियों और नए आकर्षणों के साथ भव्य होने जा रहा है। अब सभी की नजर सात नवंबर के आयोजन और मुख्य अतिथि की आधिकारिक घोषणा पर टिकी है।











