Ayatollah Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के पश्चात आधिकारिक शोक समारोहों की घोषणा कर दी गई है। 4 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले इस शोक कार्यक्रम में वैश्विक स्तर पर कई देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। भारत की ओर से भी एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इसमें शामिल होने के लिए ईरान रवाना हो रहा है। ऐसे में वैश्विक जनमानस में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि ईरान में एक सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व का अंतिम संस्कार किन धार्मिक प्रक्रियाओं के तहत संपन्न होता है।
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धार्मिक शुद्धि की पहली प्रक्रिया: गुस्ल
इस्लामी शिया परंपरा के अनुसार, अंतिम संस्कार की शुरुआत ‘गुस्ल’ (धार्मिक शुद्धि) से होती है। यह मृतक के शरीर को पवित्र करने की एक अनिवार्य रस्म है, जिसे अत्यंत सम्मान और पवित्रता के साथ संपन्न किया जाता है। प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है:
प्रथम चरण: पानी में कमल या बेर के पत्ते मिलाकर उससे शरीर को पवित्र किया जाता है।
द्वितीय चरण: पानी में कपूर का मिश्रण तैयार किया जाता है, जिससे शरीर को शुद्ध किया जाता है।
तृतीय चरण: अंत में पूर्णतः साफ और शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। यह रस्म शरीर को भौतिक और आध्यात्मिक रूप से विदा करने के लिए की जाती है।
कफन: सादगी और धार्मिक मर्यादा
गुस्ल के बाद पार्थिव शरीर को ‘कफन’ में लपेटा जाता है। शिया परंपरा के अनुसार, कफन सूती और सफेद रंग के कपड़े का होता है, जो सादगी और समानता का प्रतीक है। इसमें मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं:
लुत्का: शरीर के निचले हिस्से को ढंकने के लिए।
कमीज: धड़ के हिस्से के लिए।
इजार: सिर से पैर तक पूरे शरीर को ढंकने वाली एक बड़ी चादर।
इस प्रक्रिया के दौरान, शरीर के उन सात अंगों पर कपूर लगाया जाता है जो नमाज के दौरान ‘सजदा’ (घुटने टेकने और माथा टेकने) की क्रिया में उपयोग होते हैं।
जनाजा और नमाज-ए-जनाजा
कफन पहनाने के बाद पार्थिव शरीर को सार्वजनिक दर्शन और जनाजे (अंतिम यात्रा) के लिए ले जाया जाता है। इसके पश्चात ‘नमाज-ए-जनाजा’ का आयोजन होता है। यह एक विशेष प्रार्थना है जिसमें सामान्य नमाज की तरह रुकू (झुकना) या सजदा नहीं होता, बल्कि खड़े रहकर विशेष दुआएं पढ़ी जाती हैं, जो मृतक की आत्मा की शांति और ईश्वर की दया के लिए होती हैं।
दफ्न: मक्का की ओर उन्मुख अंतिम विश्राम
अंतिम चरण ‘दफ्न’ (दफनाने) का है। इसमें कब्र की दिशा का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि मृतक का चेहरा मक्का (काबा) की ओर रहे। शव को कब्र में रखने के बाद कफन की गांठें खोल दी जाती हैं।
तल्कीन और विदाई का अंतिम पाठ
कब्र को मिट्टी से ढंकने से पूर्व एक महत्वपूर्ण रस्म ‘तल्कीन’ निभाई जाती है। इसमें एक धर्मगुरु मृतक को आस्था के सिद्धांतों और शिया इमामों के नाम का स्मरण कराते हैं। यह प्रक्रिया मृतक को परलोक की यात्रा के लिए तैयार करने का आध्यात्मिक संदेश है। अंत में, लकड़ी के तख्तों या पत्थरों से कब्र को सील कर उस पर मिट्टी डाली जाती है, जिससे यह गरिमामयी अंतिम संस्कार संपन्न होता है।
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