बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने और उसके बाद शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से ही उनकी पार्टी ‘आवामी लीग’ पर संकट के बादल छाए हुए थे। अब चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए आवामी लीग के नेताओं को आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में भाग लेने की सशर्त अनुमति प्रदान कर दी है। यद्यपि आवामी लीग पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध अभी भी बरकरार है, लेकिन आयोग के इस फैसले ने पार्टी के उन नेताओं के लिए एक अवसर पैदा किया है जो फिर से चुनावी राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब शेख हसीना, जो 2024 के तख्तापलट के बाद से भारत में रह रही हैं, के राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं।
हलफनामा दाखिल करना अनिवार्य
चुनाव आयोग द्वारा दी गई यह छूट पूरी तरह से बिना शर्त नहीं है। आयोग के नए नियमों के मुताबिक, यदि आवामी लीग का कोई नेता चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे एक औपचारिक हलफनामा दाखिल करना होगा। इस हलफनामे में उम्मीदवार को स्पष्ट रूप से यह घोषित करना होगा कि वह किसी भी प्रतिबंधित या देशद्रोही संगठन से जुड़ा हुआ नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला लेने के पीछे ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) का नरम रुख एक प्रमुख कारण है। बीएनपी का एक धड़ा चाहता है कि आवामी लीग के बेदाग छवि वाले नेताओं को चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनने दिया जाए, ताकि भविष्य में आवामी लीग को दो गुटों में विभाजित किया जा सके और पार्टी का राजनीतिक प्रभाव कम हो सके।
इस साल के अंत में प्रस्तावित हैं पंचायत और निकाय चुनाव
बांग्लादेश में चुनावी प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। देश में इस वर्ष के अंत तक पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। प्रभारी मंत्री फखरुल इस्लाम आलमगीर ने पुष्टि की है कि सरकार और चुनाव आयोग की प्राथमिकता साल के अंत तक सभी स्थानीय निकायों में चुनाव संपन्न कराने की है। गौरतलब है कि फरवरी 2026 में हुए आम चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी ने दो-तिहाई बहुमत से जीत हासिल की थी, जिसमें आवामी लीग को शामिल होने की अनुमति नहीं मिली थी। स्थानीय चुनावों में मिली यह नई अनुमति आवामी लीग के लिए अपनी खोई हुई साख को पुनर्जीवित करने का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण जरिया हो सकती है।
राजनीतिक भविष्य और अंतरिम सरकार की भूमिका पर चर्चा
अगस्त 2024 में हुए तख्तापलट ने बांग्लादेश की पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल दी थी। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता संभाली थी। हसीना के समर्थकों का दावा है कि यह तख्तापलट विदेशी ताकतों के इशारे पर हुआ था। इस बदलाव के बाद से ही यूनुस सरकार ने आवामी लीग पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे, जिससे पार्टी 2026 के आम चुनावों से पूरी तरह बाहर रही। अब चुनावी राजनीति में मिली इस सशर्त एंट्री से यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह कदम आवामी लीग को फिर से मजबूत करेगा या बीएनपी की रणनीति के तहत पार्टी का आंतरिक बिखराव और बढ़ेगा।
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