Awadh Ojha on Rahul Gandhi: अवध ओझा की राहुल गांधी को बड़ी नसीहत, बोले- ‘उन्हें एक अच्छे राजनीतिक गुरु की जरूरत’

मशहूर शिक्षाविद अवध ओझा ने राहुल गांधी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए उन्हें बड़ी सलाह दी है। ओझा के मुताबिक, राहुल गांधी को खुद के फैसले लेने के लिए एक अच्छे 'राजनीतिक गुरु' की सख्त जरूरत है।

Awadh Ojha on Rahul Gandhi

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 2, 2026

Awadh Ojha on Rahul Gandhi: आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और देश के मशहूर शिक्षाविद अवध ओझा अपने बेबाक और सटीक राजनीतिक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के विदेशी दौरों और उनके राजनीतिक सफर पर खुलकर अपनी राय रखी है। राजनीति से संन्यास ले चुके अवध ओझा ने राहुल गांधी के नेतृत्व कौशल की तारीफ तो की, लेकिन साथ ही उन्हें भविष्य में एक बेहद सफल राजनेता बनने के लिए 2 बेहद महत्वपूर्ण और खास नसीहतें भी दे डालीं।

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‘राहुल गांधी को चाहिए एक मजबूत पॉलिटिकल गुरु’

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अवध ओझा की राहुल गांधी को बड़ी नसीहत

न्यूज एजेंसी ‘आईएएनएस’ (IANS) से खास बातचीत के दौरान अवध ओझा ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ को और अधिक निखारने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपनी निर्णय क्षमता को और मजबूत करने के लिए दो बुनियादी चीजों पर काम करने की जरूरत है, अवध ओझा ने कहा, “राहुल गांधी विदेश यात्राओं पर क्यों जाते हैं, यह तो मुझे नहीं पता, लेकिन एक राजनेता के तौर पर उन्होंने खुद में बहुत अच्छा विकास किया है। हालांकि, उन्हें इस वक्त एक ऐसे अच्छे राजनीतिक गुरु की जरूरत है, जो उनके भीतर गहरी राजनीतिक समझ (Political Understanding) पैदा करने में मदद कर सके।”

उन्होंने आगे कहा कि जब तक राहुल गांधी के अंदर परिपक्व राजनीतिक समझ पूरी तरह विकसित नहीं होगी, तब तक वह राजनीति के शतरंज पर अपने बड़े और कड़े फैसले खुद नहीं ले पाएंगे। ओझा ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब यह कतई नहीं है कि राहुल गांधी बैठकर राजनीति विज्ञान की किताबें पढ़ें, बल्कि उन्हें व्यावहारिक राजनीति की गहरी समझ विकसित करनी होगी।

‘इतिहास के महान शासकों से सीखें नेतृत्व का गुण’

अवध ओझा का मानना है कि राहुल गांधी पहले के मुकाबले अब एक बेहतर राजनेता के तौर पर उभर रहे हैं और उनके हाव-भाव और भाषणों में काफी सकारात्मक सुधार हुआ है। उन्होंने राहुल गांधी को दूसरी बड़ी सलाह देते हुए इतिहास के पन्नों से सीख लेने को कहा।

ओझा ने कहा कि राहुल गांधी को चंद्रगुप्त मौर्य, समुद्रगुप्त, अलाउद्दीन खिलजी और मुगल बादशाह अकबर जैसे इतिहास के महान शासकों और उनकी रणनीतियों का गहराई से अध्ययन करना चाहिए।

उन्होंने सलाह दी कि राहुल गांधी को अकबर के ‘नवरत्नों’ वाले कॉन्सेप्ट को समझना चाहिए। यानी उन्हें अपने आसपास ऐसे काबिल और चतुर रणनीतिकारों को रखना चाहिए जो हर परिस्थिति में सही सलाह दे सकें। अगर वह ऐसा करते हैं, तो भारतीय राजनीति में एक बेहद सफल और अजेय राजनेता बन सकते हैं।

आखिर क्यों अक्सर विवादों में घिर जाते हैं राहुल के विदेशी दौरे?

राहुल गांधी जब भी विदेश यात्रा पर जाते हैं, भारत में सियासी पारा चढ़ जाता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार उन पर यह आरोप लगाती रही है कि वह विदेश जाकर भारत विरोधी लॉबी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मुलाकात करते हैं, जो देश की संप्रभुता और छवि के खिलाफ है।

हाल ही में संसद के पटल पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी पर तंज कसा था। दरअसल, जब राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष पर उन्हें बोलने का पर्याप्त मौका न देने का आरोप लगाया था, तो गृह मंत्री ने तीखा पलटवार करते हुए कहा था कि जब भी सदन में देश के गंभीर मुद्दों पर बोलने या बहस करने का मौका आता है, तो राहुल गांधी जर्मनी और इंग्लैंड घूमने निकल जाते हैं।

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