Avimukteshwaranand Controversy: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उठे विवाद पर शुक्रवार को विधानसभा में अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति स्वतः शंकराचार्य का पद नहीं धारण कर सकता और कानून सबके लिए बराबर है। उन्होंने दोहराया कि “मैं भी कानून से ऊपर नहीं हूं।”
कानून सभी के लिए समान
सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि भारत में कानून का शासन सर्वोपरि है। प्रत्येक नागरिक, चाहे वह सामान्य व्यक्ति हो या कोई धार्मिक पदाधिकारी, कानून के दायरे में ही रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई पार्टी किसी व्यक्ति को पूजती है तो यह उसका व्यक्तिगत अधिकार है, लेकिन व्यवस्था और नियम सभी के लिए समान हैं।योगी ने कहा, “कानून आम आदमी के लिए जो है, वही मेरे लिए भी है। कोई भी व्यक्ति खुद को मुख्यमंत्री, मंत्री या किसी संगठन का अध्यक्ष बताकर घूम नहीं सकता।”
प्रणाली और नियमों का पालन आवश्यक
मुख्यमंत्री ने माघ मेले के दौरान उठाए गए विवाद को जानबूझकर बढ़ाया गया मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में व्यवस्था और नियमों के पालन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद अत्यंत पवित्र है और इसे परंपरागत नियमों के अनुसार ही संभाला जाता है। सीएम ने उदाहरण देते हुए कहा, जैसे विधानसभा में सदन नियमों का पालन अनिवार्य है, वैसे ही धार्मिक पदों पर परंपरागत नियमों का पालन जरूरी है।
Shankaracharya Controversy: शंकराचार्य विवाद में उमा भारती का बड़ा बयान, कहा ‘खुशफहमी न पालें’
माघ मेले का सफल प्रबंधन
सीएम योगी ने माघ मेले में श्रद्धालुओं के विशाल आगमन का जिक्र करते हुए कहा कि साढ़े चार करोड़ लोग इस दौरान पहुंचे थे। इतनी बड़ी भीड़ में सुव्यवस्थित प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्थाओं का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।“जो आम नागरिक के लिए नियम हैं, वही मेरे लिए भी हैं,” उन्होंने दोहराया।
सपा को लगाई चुनौती

योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी को भी कटाक्ष किया और पूछा कि यदि अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य माना जाता था, तो पहले वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि नियम और मर्यादा का पालन सबको करना होगा। सीएम ने चार पीठों—ज्योतिष (उत्तर), श्रृंगेरी (दक्षिण), पुरी (पूर्व), द्वारका (पश्चिम)—का हवाला देते हुए कहा कि शंकराचार्य की मान्यता परंपरागत नियमों और सिद्धांतों के आधार पर तय होती है।
Magh Mela 2026: प्रयागराज में श्रद्धालुओं का रेला, 25 दिनों में 18 करोड़ ने लिया पवित्र स्नान
अवरुद्ध मार्ग और कानून का उल्लंघन
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं के मार्ग को रोकना किसी जिम्मेदार व्यक्ति के आचरण के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि कानून और नियमों के नाम पर भ्रम फैलाना बंद करें। मुख्यमंत्री का यह रुख स्पष्ट संदेश देता है कि धार्मिक पद और कानून की मर्यादा दोनों का सम्मान करना आवश्यक है, और कोई भी इसे व्यक्तिगत मनमानी से तोड़ नहीं सकता।









