Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary: अटल जी को PM मोदी ने किया याद, बोले- अद्वितीय दृष्टि का था वरदान

अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल जी को याद करते हुए उनके दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें अद्वितीय दृष्टि का वरदान प्राप्त था। आखिर अटल जी की कौन सी विरासत आज भी प्रेरणा देती है?

Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 16, 2026

Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary:  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन नवीन, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली स्थित वाजपेयी के स्मारक ‘सदैव अटल’ पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। नेताओं ने राष्ट्र निर्माण और भारतीय राजनीति में उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

भारतीय राजनीति के महान नेताओं में गिने जाते हैं वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और देश की राजनीति पर अपनी अलग छाप छोड़ी। 16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। उनकी पुण्यतिथि पर देश उन्हें एक महान राजनेता, वक्ता और राष्ट्रसेवक के रूप में याद करता है।

पीएम मोदी ने बताया असाधारण और दूरदर्शी नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके नेतृत्व और राष्ट्र सेवा को याद किया। उन्होंने कहा कि अटल जी असाधारण राजनेता थे और उन्हें अद्वितीय दूरदृष्टि प्राप्त थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा और भारत को सशक्त बनाने के लिए समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वाजपेयी के विचार, नीतियां और सुशासन की उनकी अवधारणा आज भी देश के विकास को दिशा प्रदान करती है।

सुशासन और जनकल्याण पर रहा विशेष जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने शासन में जनकल्याण और सुशासन को विशेष महत्व दिया। उनके विचार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े आदर्श आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने देश के विकास को व्यापक दृष्टिकोण से देखा और बुनियादी ढांचे, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विदेश नीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण फैसले लिए।

पोखरण परीक्षण से भारत बना परमाणु शक्ति

वाजपेयी सरकार के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में वर्ष 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उनकी सरकार ने भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने का फैसला किया। इन परीक्षणों के बाद भारत ने खुद को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वर्णिम चतुर्भुज और ग्रामीण सड़कों पर जोर

अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ परियोजना के जरिए देश के प्रमुख शहरों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की महत्वाकांक्षी पहल की गई। वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। इन योजनाओं ने देश की कनेक्टिविटी को नई गति दी।

कारगिल युद्ध में दिखाया दृढ़ नेतृत्व

वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व की भी व्यापक सराहना हुई। उनकी सरकार ने सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। भारतीय सेना ने कठिन परिस्थितियों में दुश्मन की घुसपैठ को नाकाम करते हुए विजय हासिल की। इस दौर में वाजपेयी की राजनीतिक परिपक्वता और कूटनीतिक क्षमता सामने आई।

ओजस्वी वक्ता और संवेदनशील कवि भी थे अटल

राजनीति के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी अपनी प्रभावशाली भाषण शैली और साहित्यिक प्रतिभा के लिए भी प्रसिद्ध थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, संघर्ष, उम्मीद और संवेदनशीलता की झलक मिलती थी। उनकी रचनाएं आज भी लोगों को कठिन परिस्थितियों में हिम्मत बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं। एक कुशल वक्ता के रूप में भी उन्होंने संसद और सार्वजनिक मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई।

अटल जी की विरासत आज भी कायम

अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन और उनके राजनीतिक सिद्धांत भारतीय सार्वजनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण विरासत माने जाते हैं। उनकी जयंती 25 दिसंबर को देशभर में ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाई जाती है। वहीं पुण्यतिथि पर राजनीतिक दलों के नेता और आम नागरिक उनके योगदान को याद करते हैं। अटल जी की राष्ट्रसेवा, विचारधारा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

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