Assam Flood Crisis: 80 हजार लोगों तक नहीं पहुंची राहत, बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 61

असम में बाढ़ संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 61 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 80 हजार प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचने में मुश्किलें सामने आ रही हैं। आखिर बाढ़ की स्थिति कितनी भयावह है और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? जानिए पूरी रिपोर्ट।

Assam Flood Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 25, 2026

Assam Flood Crisis: पूर्वोत्तर राज्य असम में बाढ़ की स्थिति शुक्रवार को भी बेहद गंभीर और भयावह बनी रही। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में डूबने से 14 और लोगों की मौत होने के बाद इस वर्ष बाढ़ और बारिश से जान गंवाने वाले लोगों का कुल आंकड़ा बढ़कर 61 तक पहुंच गया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी एएसडीएमए द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, इन नए मामलों में चराईदेव जिले में सात, शिवसागर जिले में छह और जोरहाट जिले में एक व्यक्ति की पानी में डूबने से मौत हुई है। राज्य के कई हिस्सों में नदियां उफान पर हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

नौ जिलों के 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन के मुताबिक, असम के चराईदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नगांव और शिवसागर समेत कुल नौ जिलों के 7,05,100 से अधिक लोग बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें शिवसागर जिला राज्य में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा है, जहां अकेले लगभग 3.5 लाख लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। इसके अलावा चराईदेव जिले में 1.9 लाख और जोरहाट जिले में 1.3 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हालांकि इससे एक दिन पहले यानी बृहस्पतिवार को राज्य के 11 जिलों में 7.21 लाख से अधिक लोग इस आपदा की चपेट में थे।

करीब 80 हजार प्रभावित लोगों तक अभी नहीं पहुंच पाई राहत सामग्री

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान स्वीकार किया कि राज्य सरकार और प्रशासन अभी तक कम से कम 80,000 बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में असमर्थ रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि कई दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए प्रशासन को कोई प्रभावी और सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्यभर में लगभग 75 प्रतिशत बिजली उपभोक्ताओं की आपूर्ति बहाल कर दी गई है, लेकिन इसके बावजूद अब भी लगभग 40,000 घर अंधेरे में डूबे हुए हैं और बिजली से पूरी तरह से वंचित हैं।

सड़कों पर जमी कीचड़ की परत और कई इलाकों से टूटा संपर्क

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि सरकार प्रभावित हर व्यक्ति तक राहत और मदद पहुंचाने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास कर रही है, लेकिन भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कुछ लोग छूट गए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नजीरा विधानसभा क्षेत्र के 30 प्रतिशत हिस्से यानी लगभग 50,000 लोगों और शिवसागर के 20 प्रतिशत हिस्से यानी 30,000 लोगों तक अब तक मदद नहीं पहुंचाई जा सकी है। हालांकि कुछ स्थानों पर बाढ़ का पानी अब कम होने लगा है, लेकिन सड़कों पर गाद और कीचड़ की मोटी परत जम जाने के कारण कई गांवों और इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट गया है।

वायुसेना की मदद से राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन की उच्चस्तरीय बैठक

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऊपरी असम के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों की तेज निगरानी के लिए कई मंत्रियों को मैदान में तैनात किया गया है। प्रशासन ने हवाई मार्ग से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री गिराने का प्रयास किया था, लेकिन इस प्रक्रिया में सामग्री क्षतिग्रस्त हो गई। इसी समस्या के समाधान के लिए वायुसेना के अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है ताकि पैकेजिंग के तरीके में सुधार किया जा सके। प्रशासन इन दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों तक हरसंभव मदद पहुंचाने के लिए पूरी तरह से युद्धस्तर पर जुटा हुआ है।

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