Assam Exit Poll 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के संपन्न होने के साथ ही कयासों का बाजार गर्म हो गया है। सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार तीसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुँचेंगे या राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन कोई बड़ा उलटफेर करेगा। ‘मैटराइज’ (Matrize) द्वारा जारी ताजा एग्जिट पोल के आंकड़ों ने एनडीए (NDA) गठबंधन के खेमे में उत्साह भर दिया है। अनुमानों के मुताबिक, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी गठबंधन एक बार फिर राज्य में मजबूती से सत्ता पर काबिज होने जा रहा है। एग्जिट पोल की मानें तो असम की जनता ने विकास और स्थिरता के नाम पर एनडीए को अपना स्पष्ट जनादेश दिया है।
सीटों का गणित: बहुमत के आंकड़े से काफी आगे एनडीए
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं, जहाँ सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है। मैटराइज के एग्जिट पोल के अनुसार, बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन इस बार 85 से 95 सीटें हासिल कर सकता है। यह आंकड़ा पिछली बार की तुलना में काफी बेहतर है। दूसरी ओर, कांग्रेस नीत ‘महाजोत’ (ASM) गठबंधन को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। सर्वे के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन केवल 25 से 32 सीटों पर सिमट सकता है। वहीं अन्य दलों और निर्दलीयों के खाते में 6 से 12 सीटें जाने का अनुमान है।
वोट शेयर का विश्लेषण: बीजेपी गठबंधन की लोकप्रियता में इजाफा
सीटों के साथ-साथ वोट प्रतिशत के मामले में भी एनडीए गठबंधन विपक्षी दलों से काफी आगे निकल गया है। एग्जिट पोल के अनुसार, बीजेपी गठबंधन को लगभग 45.5 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है, जो राज्य में उसकी बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। इसके मुकाबले, कांग्रेस गठबंधन को 39.8 फीसदी वोट शेयर मिल सकता है। अन्य दलों को 14.7 फीसदी वोट मिलने की संभावना है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि बीजेपी न केवल अपनी सीटें बढ़ाने में सफल रही है, बल्कि उसने अपने वोट बैंक को भी और अधिक संगठित और मजबूत किया है।
2021 बनाम 2026: एनडीए की बड़ी छलांग और विपक्ष का पतन
यदि 2021 के चुनाव परिणामों से इसकी तुलना करें, तो एनडीए की स्थिति में जबरदस्त सुधार हुआ है। 2021 में एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 95 तक पहुँच सकता है। इसके विपरीत, विपक्षी गठबंधन ‘महाजोत’ को पिछली बार 50 सीटें मिली थीं, जो इस बार घटकर लगभग आधी (25-32) रह सकती हैं। विपक्षी खेमे में रायजोर दल और असम जातीय परिषद जैसे दलों के शामिल होने के बावजूद, एनडीए की किलेबंदी को तोड़ना कांग्रेस के लिए एक मुश्किल चुनौती साबित हुआ है।
| Alliance / Party | Axis My India (Seats) | Vote Share (%) |
| NDA (BJP+AGP+UPPL) | 88 – 100 | 48% |
| Congress+ (Maha-Jot) | 24 – 36 | 38% |
| AIUDF | 02 – 04 | – |
| Others | 01 – 03 | 14% |
असम के मुख्य सियासी गठबंधन और चुनावी मैदान
इस बार असम का चुनावी मैदान मुख्य रूप से दो बड़े गुटों में बंटा था। एक तरफ एनडीए है, जिसमें बीजेपी के साथ असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) शामिल हैं। दूसरी ओर, ‘असम संमिलित महाजोत’ (ASM) है, जिसमें कांग्रेस के साथ रायजोर दल, असम जातीय परिषद और वामपंथी दल चुनावी ताल ठोक रहे थे। एआईयूडीएफ (AIUDF), यूपीपीएल और आम आदमी पार्टी जैसे दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला एनडीए और कांग्रेस गठबंधन के बीच ही सिमट गया।
4 मई का इंतजार: क्या है हिमंत बिस्वा सरमा का भविष्य?
एग्जिट पोल के नतीजों ने हिमंत बिस्वा सरमा के पक्ष में लहर दिखाई है, लेकिन आधिकारिक मोहर 4 मई को लगने वाली मतगणना के बाद ही लगेगी। अगर ये आंकड़े हकीकत में बदलते हैं, तो हिमंत बिस्वा सरमा का कद न केवल राज्य में बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी और ऊंचा हो जाएगा। क्या असम की जनता ने वास्तव में कांग्रेस के वादों को नकार कर बीजेपी के ‘डबल इंजन’ मॉडल को चुना है? इस सवाल का अंतिम जवाब मतगणना के दिन ही मिलेगा, जिसने फिलहाल राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।









