Assam Election 2026: असम में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में मतदान होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को अपने 42 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इस सूची के माध्यम से पार्टी ने संदेश दिया है कि वह इस बार सत्ता विरोधी लहर और अपने अनुभवी नेताओं के दम पर भाजपा को कड़ी टक्कर देने के मूड में है।
प्रमुख चेहरों पर भरोसा: गौरव गोगोई और दिग्गज नेताओं की भूमिका
कांग्रेस की इस पहली सूची में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं। पार्टी ने अपने सबसे प्रखर चेहरों में से एक और सांसद गौरव गोगोई को जोरहाट विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है। गौरव गोगोई की उम्मीदवारी यह दर्शाती है कि कांग्रेस इस बार अपनी ‘भारी-भरकम’ तोपों को चुनावी मैदान में उतारकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया अपनी पारंपरिक सीट नजीरा से एक बार फिर ताल ठोकेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रिपुन बोरा को बारचल्ला से टिकट दिया गया है। इन दिग्गजों के कंधों पर न केवल अपनी सीट जीतने की, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।


महिला सशक्तिकरण और समावेशी राजनीति का प्रयास
कांग्रेस की इस 42 सदस्यीय सूची में सामाजिक संतुलन साधने की भी कोशिश की गई है। पार्टी ने पहली लिस्ट में पांच महिला उम्मीदवारों को स्थान दिया है, जो यह दर्शाता है कि चुनावी रणनीति में महिलाओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रियंका गांधी की सक्रियता और राज्य में उनके दौरों का असर टिकट बंटवारे में भी साफ नजर आ रहा है। पार्टी आलाकमान का मानना है कि जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले कार्यकर्ताओं और महिलाओं को आगे लाकर वे भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को चुनौती दे सकते हैं।
बीजेपी का किला और हिमंत बिस्वा सरमा की चुनौती
वर्तमान में असम की सत्ता पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा है और हिमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री के रूप में सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। वर्तमान विधानसभा के गणित को देखें तो भाजपा के पास अपने दम पर 64 विधायक हैं। यदि उनके सहयोगी दलों (NDA) को मिला लिया जाए, तो सत्तारूढ़ गठबंधन के पास सदन में स्पष्ट और मजबूत बहुमत है। भाजपा पिछले एक दशक से असम के विकास और पहचान के मुद्दों पर चुनाव लड़ती आ रही है। मुख्यमंत्री सरमा की लोकप्रियता और उनकी आक्रामक कार्यशैली कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सत्ता के 10 साल और कांग्रेस की वापसी की छटपटाहट
असम में पिछले 10 वर्षों से NDA की सरकार है। साल 2021 के चुनावों में भाजपा गठबंधन ने 75 सीटें जीतकर एक नया इतिहास रचा था। वह पहली बार था जब किसी गैर-कांग्रेसी गठबंधन ने असम में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। दूसरी ओर, कांग्रेस जो कभी असम की निर्विवाद शक्ति हुआ करती थी, वर्तमान में केवल 26 सीटों पर सिमटी हुई है। इस बार के चुनाव कांग्रेस के अस्तित्व और प्रासंगिकता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रियंका गांधी खुद इस चुनाव की कमान संभाल रही हैं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार हुआ है।










