Assam Arunachal Border Clash: सीमा विवाद में खूनी झड़प और फायरिंग, 18 घायल; कई गंभीर

असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर जमीन विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। फायरिंग की घटना में 18 लोग घायल हुए, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और दोनों राज्यों में तनाव बढ़ गया है। अब सवाल है, आखिर विवाद इतना बढ़ा कैसे और आगे क्या होगा?

Assam Arunachal Border Clash

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 11, 2026

Assam Arunachal Border Clash:  असम के धेमाजी जिले में अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे इलाके में सोमवार को गोलीबारी की घटना सामने आई। इस हिंसक झड़प में कम से कम 18 लोग घायल हो गए, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विवाद जमीन पर दावे को लेकर शुरू हुआ था और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया, जिसके मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

अरुणाचल की ओर से गोलीबारी का आरोप

असम पुलिस के अनुसार, गोलीबारी सोमवार सुबह धेमाजी जिले के गोगमुख रेवेन्यू सर्कल के मिंगमांग बदाती इलाके में हुई। आरोप है कि अरुणाचल प्रदेश की ओर से आए कुछ लोगों ने असम की तरफ कथित तौर पर अंधाधुंध गोलीबारी की। घटना में घायल हुए सभी लोगों को तत्काल गोगमुख ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सात घायलों को धेमाजी सिविल अस्पताल रेफर किया गया।

चार घायलों की हालत गंभीर

अधिकारियों के मुताबिक, चार गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि दोबारा किसी तरह की हिंसक झड़प न हो।

हिमंत बिस्वा सरमा ने दिए सख्त निर्देश

घटना की जानकारी मिलते ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ी को मौके पर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सबसे पहले स्थिति को शांत करना और गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने असम पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य की जमीन का एक इंच हिस्सा भी किसी हालत में नहीं खोया जाना चाहिए।

शिक्षा मंत्री को सौंपी विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाद में कहा कि यह घटना फिलहाल स्थानीय स्तर का विवाद प्रतीत होती है और हालात नियंत्रण में हैं। उन्होंने असम के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू को अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ बातचीत कर मामले का समाधान निकालने की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के बीच भी बातचीत हुई है। अधिकारियों का उद्देश्य तनाव को जल्द से जल्द कम करना है।

804 किलोमीटर लंबी है दोनों राज्यों की सीमा

असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच करीब 804 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है। दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। मौजूदा गोलीबारी की घटना को भी इसी पुराने विवाद और जमीन पर दावों से जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों राज्यों में फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है।

1987 से जारी है सीमा विवाद

असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद की जड़ें पूर्वोत्तर के पुनर्गठन के दौर से जुड़ी हैं। अरुणाचल प्रदेश को पहले नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) के नाम से जाना जाता था और इसका प्रशासन केंद्र सरकार के अधीन था। बाद में इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और वर्ष 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। राज्य बनने के बाद गठित तीन सदस्यीय समिति ने असम के कुछ क्षेत्रों को अरुणाचल प्रदेश में शामिल करने की सिफारिश की थी, लेकिन असम ने इन सिफारिशों का विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित है सीमा विवाद

सीमा को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद लंबे समय से बने हुए हैं और मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। असम सरकार ने 29 जुलाई को विधानसभा में बताया था कि राज्य के सात जिलों में कुल 16,144.01 हेक्टेयर जमीन पर अरुणाचल प्रदेश का कब्जा होने का दावा है। इन जिलों में सोनितपुर, बिस्वनाथ, लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और चराइदेव शामिल हैं।

नामसाई डिक्लेयरेशन से समाधान की कोशिश

वहीं, अरुणाचल प्रदेश विवादित क्षेत्रों में करीब 858.91 वर्ग किलोमीटर जमीन पर अपना दावा करता है। सीमा विवाद को खत्म करने के लिए जुलाई 2022 में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के बीच एक समझौता हुआ था। इसे ‘नामसाई डिक्लेयरेशन’ के नाम से जाना जाता है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में जमीन और सीमा को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। ताजा गोलीबारी ने एक बार फिर दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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