Asim Munir Controversy: पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और अल्पसंख्यक शिया समुदाय के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। बीते गुरुवार, 19 मार्च 2026 को रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में एक ऐसी बैठक हुई, जिसने देश के भीतर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक दर्जन से अधिक शिया धर्मगुरुओं के साथ मुलाकात की थी। इस बैठक का उद्देश्य ईरान-पाकिस्तान युद्ध और देश की आंतरिक सुरक्षा पर चर्चा करना था, लेकिन इसमें जो कुछ हुआ, उसने पूरे शिया समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने शुक्रवार को इस गुप्त बैठक की कड़वी सच्चाई दुनिया के सामने लाकर रख दी।
अयातुल्लाह खामेनेई की मौत और प्रदर्शन पर भड़के मुनीर
अल्लामा आगा शिफा नजफी ने इस्लामाबाद की एक मस्जिद में इस घटनाक्रम का खुलासा करते हुए बताया कि आसिम मुनीर बैठक के दौरान बेहद गुस्से में थे। मुनीर की नाराजगी का मुख्य कारण अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद इस्लामाबाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में हुए विशाल प्रदर्शन थे। मुनीर ने उग्र लहजे में कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान में सैन्य इमारतों को जलाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी दौरान उन्होंने शिया उलेमाओं को नीचा दिखाते हुए अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा, “अगर आपको ईरान से इतनी ही मोहब्बत है, तो आप सब ईरान चले जाओ।”
देशभक्ति पर सवाल: शिया समुदाय का सेना में योगदान
मुनीर के इस ‘देश निकाला’ देने वाले बयान पर अल्लामा आगा शिफा नजफी ने उन्हें तत्काल टोकते हुए करारा जवाब दिया। उन्होंने फील्ड मार्शल को याद दिलाया कि पाकिस्तान की फौज में बड़ी संख्या में शिया अधिकारी और जवान अपनी जान हथेली पर रखकर देश की सेवा कर रहे हैं। नजफी ने भावुक होते हुए अपने मामा अमीर हयात का जिक्र किया, जिन्हें उनकी बहादुरी के लिए ‘सितारा-ए-जुर्रत’ से नवाजा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिया समुदाय की जड़ें इसी मिट्टी में हैं और उनके परिवार के कई सदस्य आज भी सरहदों की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में उलेमाओं का कोई हाथ नहीं था, जिसकी पुष्टि खुद आईजी इस्लामाबाद ने की थी।
दोहरा मापदंड: आतंकवादियों को पनाह और अपनों को तिरस्कार
अल्लामा आगा शिफा नजफी ने आसिम मुनीर की मानसिकता पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जिन आतंकियों ने पाकिस्तानी सैनिकों के सिर काटकर उनके साथ फुटबॉल खेला और इस्लामाबाद में सिटिंग जनरल की हत्या की, क्या सेना ने कभी उनसे कहा कि वे अफगानिस्तान चले जाएं? लेकिन आज एक शांतिप्रिय समुदाय से, जिसने कभी किसी सैनिक की जान नहीं ली, उसे ईरान जाने को कहा जा रहा है। नजफी के मुताबिक, मुनीर का यह दोहरा मापदंड पाकिस्तान के आंतरिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर रहा है। हालांकि, तर्कों के बाद मुनीर का लहजा थोड़ा नरम हुआ, लेकिन उनके शब्द शिया समुदाय के दिल में गहरे घाव छोड़ गए हैं।
सऊदी-ईरान संघर्ष: पाकिस्तान की सैन्य भागीदारी की चेतावनी
बैठक के अंत में आसिम मुनीर ने एक बड़ी रणनीतिक घोषणा भी की। उन्होंने शिया धर्मगुरुओं को बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ एक मजबूत रक्षा समझौता है। मुनीर ने स्पष्ट किया कि चूंकि ईरान लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहा है, इसलिए पाकिस्तान खामोश नहीं रहेगा। उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं, तो पाकिस्तान अपनी रक्षा संधि के तहत सऊदी की सुरक्षा के लिए अपनी सेना उतारने को मजबूर होगा। यह बयान संकेत देता है कि पाकिस्तान अब मध्य-पूर्व के संघर्ष में सीधे तौर पर कूदने की तैयारी कर रहा है।
धार्मिक नेतृत्व और सेना के बीच बढ़ती खाई
आसिम मुनीर का यह व्यवहार न केवल कूटनीतिक रूप से अपरिपक्व है, बल्कि यह पाकिस्तान के भीतर सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी बड़ा खतरा है। अल्लामा आगा शिफा नजफी के इन खुलासों के बाद शिया समुदाय में भारी रोष है। आने वाले दिनों में यह देखना चुनौतीपूर्ण होगा कि पाकिस्तान सरकार इस आंतरिक असंतोष और बाहरी युद्ध के मोर्चों को कैसे संभालती है।









