Kannauj: बिना सूचना नदारद रहे DM, नाराज होकर कार्यक्रम से लौटे मंत्री असीम अरुण

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में राज्य मंत्री असीम अरुण और जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के बीच प्रोटोकॉल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में 45 मिनट तक डीएम का इंतजार करने के बाद मंत्री नाराज होकर वापस लौट गए। पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण ने इस अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए डीएम को पत्र लिख नाराजगी जताई है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 27, 2026

Kannauj: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से प्रशासनिक शिथिलता की एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन की लापरवाही का सामना करना पड़ा। बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मंत्री को जिलाधिकारी (DM) का लगभग पौन घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद वे असहज होकर और नाराजगी जताते हुए बिना कार्यक्रम संपन्न किए वापस लौट गए।

नदारद रहे जिले के आला अधिकारी

कन्नौज के स्थानीय कार्यक्रम में राज्य मंत्री असीम अरुण को शाम 5:30 बजे मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के नाते समय की पाबंदी के लिए पहचाने जाने वाले असीम अरुण ठीक तय वक्त पर आयोजन स्थल पर पहुंच गए। हालांकि, वहां का नजारा देख हर कोई दंग रह गया। कार्यक्रम स्थल पर न तो जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री मौजूद थे और न ही प्रशासन का कोई अन्य वरिष्ठ चेहरा। बताया जा रहा है कि एसडीएम (SDM) और एडीएम (ADM) भी मंत्री के आगमन के 15 मिनट बाद मौके पर पहुंचे, जिससे व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आई।

डीएम की प्रतीक्षा और प्रशासनिक अनुशासन का अभाव

हैरानी की बात तब हुई जब मंच से यह घोषणा की गई कि कार्यक्रम की शुरुआत जिलाधिकारी के आने के बाद ही की जाएगी। मंत्री असीम अरुण ने धैर्य परिचय देते हुए लगभग 45 मिनट तक डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री का इंतजार किया। खबरों की मानें तो अधिकारियों को शायद यह अंदाजा था कि मंत्री अक्सर देरी से आते हैं, लेकिन असीम अरुण के समय पर पहुंचने से जिला प्रशासन की “लेट-लतीफी” उजागर हो गई। अंततः, काफी देर तक सम्मानजनक स्थिति न बनते देख मंत्री जी ने कार्यक्रम स्थल छोड़ना ही बेहतर समझा।

जिलाधिकारी को पत्र लिख जताई नाराजगी

इस पूरे घटनाक्रम के बाद असीम अरुण ने प्रशासनिक उदासीनता पर सख्त नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने डीएम को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस अव्यवस्था की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और जो अव्यवस्था दिखी, वह स्वीकार्य नहीं है। मंत्री ने पत्र में बिंदुवार तरीके से कार्यक्रम में हुई देरी और अधिकारियों की अनुपस्थिति का जिक्र किया है।

पूर्व आईपीएस बनाम जिला प्रशासन

राजनीति में आने से पहले असीम अरुण एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहे हैं, इसलिए वे पुलिस और प्रशासनिक अनुशासन की बारीकियों को बखूबी समझते हैं। जानकारों का कहना है कि एक कैबिनेट स्तर के मंत्री के प्रोटोकॉल का इस तरह उल्लंघन होना गंभीर मामला है। जिला प्रशासन की इस चूक ने न केवल सरकार की छवि पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की भारी कमी है। अब देखना यह होगा कि इस पत्र के बाद शासन स्तर पर जिलाधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।