Delhi News: ‘मैं घायल हूं इसलिए घातक हूं’, AAP के आरोपों पर राघव चड्ढा का फिल्मी अंदाज में पलटवार!
CBI की चुनौती पर जवाब

केजरीवाल की याचिका सीबीआई की उस अर्जी के जवाब में दायर की गई है जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। दरअसल, निचली अदालत ने केजरीवाल को समन की अनदेखी के आरोपों से बरी कर दिया था। अब यह मामला ऊपरी अदालत में चुनौती के रूप में पहुंचा है। केजरीवाल स्वयं अदालत में यह बताएंगे कि उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई कानूनी रूप से सही नहीं है। उन्होंने अपनी याचिका में निष्पक्ष सुनवाई का हवाला देते हुए मौजूदा बेंच के सामने केस न चलने की गुजारिश की है। इस कदम से सुनवाई में नया पेंच फंस गया है और मामला हाई-प्रोफाइल बन गया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट का पिछला फैसला
इस विवाद की जड़ 22 जनवरी को सुनाए गए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले में है। उस समय ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बड़ी राहत दी थी। कोर्ट ने माना कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) यह साबित करने में नाकाम रहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की। कोर्ट ने कहा था कि जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं और केजरीवाल को समन मामले में बरी कर दिया। इस फैसले ने जांच एजेंसियों की साख पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
ED और CBI की घेराबंदी
निचली अदालत से बरी होने के बाद, 30 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एजेंसियों का तर्क है कि केजरीवाल जांच में सहयोग नहीं कर रहे और बार-बार बुलाए जाने के बावजूद पेश नहीं हुए, जो कानून का उल्लंघन है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। एक ओर एजेंसियां अपनी दलीलें पेश करेंगी, वहीं केजरीवाल खुद अपना बचाव करेंगे।
राजनीति और भविष्य पर असर
यह हाई-प्रोफाइल मामला केवल कानूनी दृष्टि से ही अहम नहीं है, बल्कि दिल्ली की राजनीति और केजरीवाल के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। अदालत के फैसले से पार्टी की राजनीतिक छवि, नेताओं की रणनीतियां और आगामी चुनावी हालात प्रभावित हो सकते हैं। केजरीवाल का स्वयं अदालत में पेश होना इस मामले को और अधिक संवेदनशील और मीडिया की निगाह में लाएगा। इस तरह, दिल्ली शराब नीति केस अब नए मोड़ पर है, और सोमवार की सुनवाई पूरे राजनीतिक और कानूनी जगत की निगाहों का केंद्र बनेगी।










