Arvind Kejriwal vs CBI: अदालत में खुद वकील बनेंगे अरविंद केजरीवाल; शराब नीति मामले में ED और CBI को देंगे सीधा जवाब

दिल्ली शराब नीति मामले में नया मोड़ आया है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कल दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी पैरवी करेंगे। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से इस केस की सुनवाई से हटने की मांग की है।

Arvind Kejriwal vs CBI

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 6, 2026

Arvind Kejriwal vs CBI:  दिल्ली शराब नीति केस में नया ट्विस्ट सामने आया है। सोमवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल स्वयं दिल्ली हाईकोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखेंगे। आम आदमी पार्टी (AAP) ने जानकारी दी है कि शराब नीति से जुड़े इस मामले में केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेंगे। पार्टी ने बताया कि केजरीवाल और इस मामले के अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने (रिक्यूजल) की मांग की है। इस कदम ने कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर शराब नीति घोटाले के आरोपों से जुड़ा हुआ है।

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CBI की चुनौती पर जवाब

Arvind Kejriwal vs CBI
अदालत में खुद वकील बनेंगे अरविंद केजरीवाल

केजरीवाल की याचिका सीबीआई की उस अर्जी के जवाब में दायर की गई है जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। दरअसल, निचली अदालत ने केजरीवाल को समन की अनदेखी के आरोपों से बरी कर दिया था। अब यह मामला ऊपरी अदालत में चुनौती के रूप में पहुंचा है। केजरीवाल स्वयं अदालत में यह बताएंगे कि उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई कानूनी रूप से सही नहीं है। उन्होंने अपनी याचिका में निष्पक्ष सुनवाई का हवाला देते हुए मौजूदा बेंच के सामने केस न चलने की गुजारिश की है। इस कदम से सुनवाई में नया पेंच फंस गया है और मामला हाई-प्रोफाइल बन गया है।

राउज एवेन्यू कोर्ट का पिछला फैसला

इस विवाद की जड़ 22 जनवरी को सुनाए गए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले में है। उस समय ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बड़ी राहत दी थी। कोर्ट ने माना कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) यह साबित करने में नाकाम रहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की। कोर्ट ने कहा था कि जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं और केजरीवाल को समन मामले में बरी कर दिया। इस फैसले ने जांच एजेंसियों की साख पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

ED और CBI की घेराबंदी

निचली अदालत से बरी होने के बाद, 30 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एजेंसियों का तर्क है कि केजरीवाल जांच में सहयोग नहीं कर रहे और बार-बार बुलाए जाने के बावजूद पेश नहीं हुए, जो कानून का उल्लंघन है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। एक ओर एजेंसियां अपनी दलीलें पेश करेंगी, वहीं केजरीवाल खुद अपना बचाव करेंगे।

राजनीति और भविष्य पर असर

यह हाई-प्रोफाइल मामला केवल कानूनी दृष्टि से ही अहम नहीं है, बल्कि दिल्ली की राजनीति और केजरीवाल के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। अदालत के फैसले से पार्टी की राजनीतिक छवि, नेताओं की रणनीतियां और आगामी चुनावी हालात प्रभावित हो सकते हैं। केजरीवाल का स्वयं अदालत में पेश होना इस मामले को और अधिक संवेदनशील और मीडिया की निगाह में लाएगा। इस तरह, दिल्ली शराब नीति केस अब नए मोड़ पर है, और सोमवार की सुनवाई पूरे राजनीतिक और कानूनी जगत की निगाहों का केंद्र बनेगी।

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