Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सरकार की ईंधन नीतियों को जनविरोधी करार देते हुए मांग की है कि पेट्रोल की कीमतों को तत्काल प्रभाव से 102 रुपए से घटाकर 82 रुपए प्रति लीटर किया जाना चाहिए। केजरीवाल के अनुसार, सरकार की वर्तमान नीतियां आम जनता की जेब काटकर तेल कंपनियों को ‘अवैध मुनाफा’ कमाने में मदद कर रही हैं।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारत की स्थिति में विरोधाभास
केजरीवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की प्रति बैरल कीमतों में आई भारी गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल के दाम स्थिर बने हुए हैं। मई महीने से पेट्रोल 102 रुपए प्रति लीटर पर टिका है, जो कि तार्किक नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें कम होती हैं, तो उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए, लेकिन यहाँ स्थिति इसके विपरीत है।
‘अवैध मुनाफा’ कमाने का आरोप
केंद्र सरकार को घेरते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2014 से लेकर अब तक कच्चे तेल की कीमतों में कम से कम छह बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इन वर्षों के दौरान तेल कंपनियों ने जो ‘बंपर मुनाफा’ कमाया, उसका हिसाब सरकार को जनता के सामने रखना चाहिए। केजरीवाल ने सवाल किया कि जनता की मेहनत की कमाई से कंपनियां जो ‘अवैध मुनाफा’ कमा रही हैं, उसे रोकने के बजाय सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है? उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऊंचे दामों के जरिए कंपनियों की झोली भरना और जनता की कमर तोड़ना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है।
ईंधन की कीमतों का महंगाई से सीधा संबंध
केजरीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल वाहन चलाने वालों का विषय नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की आम महंगाई दर से है। ईंधन महंगा होने से परिवहन (Transportation) और माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिससे बाजार में हर जरूरी वस्तु—सब्जी, राशन से लेकर अन्य दैनिक आवश्यकताओं तक—महंगी हो जाती है। यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 रुपए प्रति लीटर की कटौती की जाती है, तो इसका सकारात्मक असर महंगाई पर पड़ेगा और देश के आम नागरिक को जीवनयापन के खर्च में बड़ी राहत मिलेगी।
सरकार से जवाबदेही की मांग
अरविंद केजरीवाल ने सरकार से सवाल किया कि वह अंततः इस मुनाफे को कहां खपा रही है? उन्होंने जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करने पर जोर देते हुए कहा कि सत्ता का काम कंपनियों का मुनाफा सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि जनकल्याण करना है। केजरीवाल का यह बयान आने वाले दिनों में महंगाई के मुद्दे पर राजनीतिक गर्मी को और तेज कर सकता है। उनके इस रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘आप’ इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाने के लिए कमर कस चुकी है।










