Ethanol Petrol Controversy: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पेट्रोल में एथेनॉल मिलाए जाने (Ethanol Blending) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता के हितों की अनदेखी कर रही है, जिससे देश के करोड़ों वाहन मालिकों को बड़ा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है।
केजरीवाल ने 29 वाहन निर्माता कंपनियों से मांगा स्पष्टीकरण
बताते चले कि, पेट्रोल में इथोनॉल मिश्रण के विषय को लगातार उठाने वाले अरविंद केजरीवाल ने इस प्रेस वार्ता के दौरान अपने अगले कदम की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वह देश की 29 प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों (Automobile Companies) को एक आधिकारिक पत्र लिख रहे हैं। इस पत्र के जरिए वह कंपनियों से सीधे तौर पर पेट्रोल में बढ़ते एथेनॉल के प्रतिशत को लेकर उनकी तकनीकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं ताकि जनता के सामने सच आ सके।
गाड़ियों के ओनर मैनुअल का हवाला
आपको बता दे कि, आम आदमी पार्टी के मुखिया ने तकनीकी तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि अधिकांश बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों का ओनर मैनुअल स्पष्ट रूप से चेतावनी देता है। इस मैनुअल के मुताबिक, साल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के इंजन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन में 10% से अधिक एथेनॉल नहीं मिलाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आम उपभोक्ताओं के बारे में सोचे बिना गलत फैसले थोप रही है, जिससे लोगों के दोपहिया और चारपहिया वाहनों के इंजन बुरी तरह डैमेज हो रहे हैं।
कल ऑटो शोरूम और मैकेनिकों के बीच जाएंगे पूर्व सीएम
केंद्र सरकार के रवैये पर तीखा प्रहार करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है और जनता की वास्तविक समस्या को समझने से पूरी तरह इनकार कर रही है। इस नीति के खिलाफ अब वे सीधे जनता की अदालत में जाएंगे। उन्होंने एलान किया कि कल वे खुद दिल्ली के कई प्रमुख वाहन शोरूम का दौरा करेंगे और वहां के शोरूम मालिकों, ऑटो इंजीनियरों व डीलरों से इस तकनीकी संकट पर जमीनी चर्चा करेंगे।
आम जनता और मैकेनिकों से संवाद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिरी हिस्से में केजरीवाल ने अपनी जनसंपर्क योजना को विस्तार से साझा किया। उन्होंने कहा कि वह सड़कों पर काम करने वाले स्थानीय ऑटो मैकेनिकों (Auto Mechanics) और आम जनता से भी सीधे बात करेंगे ताकि यह जाना जा सके कि इस मिलावटी पेट्रोल से उनकी जेब पर कितना असर पड़ रहा है। केजरीवाल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह के फैसलों को जबरन थोपना तानाशाही है, और केंद्र सरकार को जनहित में अपनी इस ईंधन नीति पर तुरंत पुनर्विचार (Review Fuel Policy) करना चाहिए।










