West Bengal: चुनाव से पहले ममता को तगड़ा झटका, कद्दावर नेता अर्घ्य राय प्रधान BJP में शामिल

West Bengal Politics: क्या अर्घ्य राय प्रधान का भाजपा में शामिल होना 2026 चुनाव का टर्निंग पॉइंट साबित होगा? कोचबिहार के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री ने आखिर क्यों ममता बनर्जी का साथ छोड़कर कमल थामने का फैसला किया? क्या इसके पीछे सुवेंदु अधिकारी की कोई गुप्त रणनीति है? जानें पूरी कहानी!

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 24, 2026

West Bengal:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही राज्य की राजनीति में दलबदल का खेल तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया ममता बनर्जी को उस वक्त करारा झटका लगा, जब पार्टी के कद्दावर नेता अर्घ्य राय प्रधान ने ऐन चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम लिया। एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अर्घ्य राय प्रधान ने आधिकारिक रूप से ‘कमल’ थामने की घोषणा की। इस घटनाक्रम को उत्तर बंगाल की राजनीति में टीएमसी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है, क्योंकि अर्घ्य राय प्रधान का अपने क्षेत्र में गहरा प्रभाव है।

सुवेंदु अधिकारी का बयान: उत्तर बंगाल के विकास का नया चेहरा

भाजपा नेता और ममता के कट्टर प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी ने अर्घ्य राय प्रधान का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि वे कूचबिहार के विकास के लिए समर्पित योद्धा रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, साल 2016 से लेकर पिछले लोकसभा चुनावों तक अर्घ्य ने अपने क्षेत्र की जनता के लिए अनुकरणीय कार्य किए हैं। सुवेंदु ने बताया कि अर्घ्य ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से विशेष चर्चा की है और उत्तर बंगाल के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्घ्य का भाजपा में शामिल होने का एकमात्र उद्देश्य क्षेत्र की जनता के लिए वास्तविक विकास सुनिश्चित करना है।

अमर राय प्रधान की विरासत: मेखलीगंज से उम्मीदवार होंगे अर्घ्य

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेता गिरिजा शंकर राय ने अर्घ्य के राजनीतिक कद की सराहना करते हुए बताया कि उनके पिता, स्वर्गीय अमर राय प्रधान, उत्तर बंगाल के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय और सम्मानित नेता थे। अर्घ्य लंबे समय तक टीएमसी के साथ रहे, लेकिन अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में आए हैं। भाजपा ने बड़ा दांव खेलते हुए यह भी ऐलान कर दिया है कि अर्घ्य राय प्रधान आगामी चुनाव में मेखलीगंज सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। वहीं, बंशी बदोन बर्मन ने इस कदम का समर्थन करते हुए राजबंशी भाषा को मान्यता देने और स्थानीय अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई है।

अर्घ्य राय प्रधान का प्रहार: ‘ममता बनाम जनता’ की लड़ाई

भाजपा में शामिल होते ही अर्घ्य राय प्रधान ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैं एक ऐसी भ्रष्ट पार्टी का साथ नहीं दे सकता जिसने जनता के भरोसे को तोड़ा है। अब मैं उस पार्टी के साथ रहकर जनता का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।” उन्होंने राज्य के मौजूदा हालात को ‘ममता बनाम जनता’ का युद्ध करार दिया। अर्घ्य के अनुसार, टीएमसी अब एक खत्म हो चुकी पार्टी है, जो केवल भाजपा और संवैधानिक संस्थाओं जैसे राष्ट्रपति पर हमला कर अपनी जमीन बचाने की कोशिश कर रही है।

ध्रुवीकरण और ‘प्लान बी’ का आरोप: ओवैसी और हुमायूं पर पलटवार

अर्घ्य राय प्रधान ने टीएमसी की रणनीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं का सक्रिय होना दरअसल टीएमसी का ‘प्लान बी’ है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भाजपा को भारतीय मुसलमानों से कोई समस्या नहीं है, लेकिन पार्टी कभी भी ‘टुकड़े-टुकड़े’ गिरोह का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने फिरहाद हकीम और हुमायूं जैसे नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे चाहे बाबरी मस्जिद बनाने की बात करें, लेकिन जनता अब समुदायों को बांटने वाली इस राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने टीएमसी पर जनता की जमीन छीनने और सांप्रदायिक आधार पर बांटने का गंभीर आरोप भी लगाया।

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