Anup Jalota On A R Rahman: ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान द्वारा बॉलीवुड में भेदभाव और सांप्रदायिकता की बात कहे जाने के बाद फिल्म जगत दो फाड़ नजर आ रहा है। भजन गायक अनूप जलोटा ने रहमान को उनके पुराने धर्म की याद दिलाते हुए एक ऐसी सलाह दी है जिसने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक हलचल मचा दी है।
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अनूप जलोटा का तीखा प्रहार
बताते चले कि, भजन सम्राट अनूप जलोटा ने ए.आर. रहमान के दावों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि यदि रहमान को वाकई ऐसा लगता है कि उनके मुस्लिम होने की वजह से उन्हें प्रोजेक्ट्स नहीं मिल रहे हैं, तो उन्हें हिंदू धर्म में वापस लौटने पर विचार करना चाहिए। जलोटा ने याद दिलाया कि रहमान का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था और बाद में उन्होंने इस्लाम अपनाया था। उनका तर्क है कि यदि वे दोबारा हिंदू बन जाते हैं, तो उन्हें पता चल जाएगा कि काम मिलने का आधार हुनर है या धर्म।
रहमान का विवादित इंटरव्यू
इस पूरे विवाद की जड़ रहमान का एक इंटरव्यू है, जिसमें उन्होंने तमिल संगीतकार के तौर पर भेदभाव के सवाल पर जवाब दिया था। रहमान ने कहा था कि पिछले आठ वर्षों में सत्ता के समीकरण बदले हैं और अब बागडोर उन लोगों के हाथ में है जो शायद रचनात्मक नहीं हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में इसे ‘सांप्रदायिक मुद्दा’ बताते हुए फिल्म ‘छावा’ के संदर्भ में ‘विभाजनकारी’ छवि की भी बात की थी। उनके इसी बयान को फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े वर्ग ने राष्ट्रविरोधी और भ्रामक बताया।
म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री में उबाल
अनूप जलोटा ने कहा कि रहमान ने इस्लाम स्वीकार करने के बाद ही संगीत की दुनिया में सबसे ज्यादा शोहरत, नाम और ऑस्कर जैसे बड़े सम्मान हासिल किए। भारतीय दर्शकों ने उन्हें हमेशा सिर-आंखों पर बिठाया। जलोटा का मानना है कि ऐसे में ‘मुसलमान होने के कारण काम न मिलने’ की बात कहना तर्कहीन है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, “मेरा सुझाव है कि वे हिंदू बनकर ट्राई करें और देखें कि क्या फिर से उन्हें फिल्में मिलने लगती हैं या नहीं।”
विवाद गहराने पर ऑस्कर विजेता की सफाई
बयान पर मचे भारी बवाल और चौतरफा आलोचना के बाद ए.आर. रहमान ने एक वीडियो जारी कर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि उनके इरादों को गलत समझा गया और उनका मकसद कभी किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। रहमान ने भारत को अपना गुरु और घर बताते हुए कहा कि संगीत हमेशा से संस्कृति को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने अपने बयान से हुई ‘तकलीफ’ के लिए लोगों से माफी भी मांगी है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बनाम व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की बहस
आपको बता दे कि, रहमान और जलोटा के बीच की यह वैचारिक जंग अब व्यक्तिगत न रहकर सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की बहस बन गई है। जहां एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी और उद्योग की कड़वी सच्चाई बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि खराब करने वाला बयान मान रहा है। अनूप जलोटा के बयान ने इस आग में घी डालने का काम किया है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और भी बढ़ सकता है।
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