UP Politics: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का संसद से पारित न होना अब देश की राजनीति में एक बड़े टकराव का कारण बन गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और विपक्षी दलों के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। इसी बीच, बीजेपी नेता अपर्णा यादव द्वारा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का झंडा जलाए जाने की तस्वीर ने आग में घी डालने का काम किया है। इस कृत्य के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की सियासत गर्मा गई है और विपक्षी नेताओं ने अपर्णा यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
विपक्ष का पलटवार
बताते चले कि, अपर्णा यादव के इस कदम पर समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान इसे ‘छोटी मानसिकता’ वाला कृत्य करार दिया। आशुतोष सिन्हा ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी हमेशा से महिलाओं के अधिकारों और उनके आरक्षण के पक्ष में आवाज उठाती रही है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि इस संशोधन विधेयक के पीछे उनकी मंशा साफ नहीं थी। आशुतोष सिन्हा ने झंडा जलाने की घटना को अनुचित बताते हुए कहा कि यह घृणित मानसिकता का परिचायक है और ऐसे कृत्य के लिए उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
कांग्रेस की नाराजगी
कांग्रेस पार्टी ने भी झंडा दहन की इस घटना की कड़ी निंदा की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे लोकतंत्र के लिए एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की असली लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी है और केंद्र सरकार विशेष सत्र बुलाकर केवल जनता को भ्रमित करना चाहती थी। अजय राय ने जोर देकर कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी दल का प्रतीक चिन्ह या झंडा जलाना विरोध की सारी हदों को पार करना है। उन्होंने मांग की कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव का अपर्णा यादव को बिना नाम लिए जवाब
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी इस विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर अपर्णा यादव का नाम नहीं लिया, लेकिन झंडा जलाए जाने पर गहरी दार्शनिक और धार्मिक टिप्पणी की। अखिलेश ने कहा कि हर रंग किसी न किसी धर्म और भावना से जुड़ा होता है। उन्होंने लाल रंग का महत्व बताते हुए कहा कि यह क्रांति का रंग है, देवियों और हनुमान जी का रंग है, और सुहाग का भी प्रतीक है। सपा अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी के झंडे को जलाकर उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाना सही नहीं है, क्योंकि लाल रंग शक्ति और आस्था का केंद्र है।
आरक्षण की लड़ाई अब निजी हमलों और प्रतीकों के अपमान तक पहुंची
महिला आरक्षण बिल जो महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लाया गया था, वह अब राजनीतिक प्रतिशोध का जरिया बनता दिख रहा है। जहाँ बीजेपी इसे विपक्ष की विफलता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बीजेपी का चुनावी स्टंट करार दे रहा है। अपर्णा यादव द्वारा झंडा जलाने की इस घटना ने बहस को विकास और नीति से हटाकर प्रतीकों के अपमान और निजी हमलों की ओर मोड़ दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद कानूनी मोड़ लेता है या राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।









