Anti Paper Leak Bill: “अब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों की खैर नहीं…” संसद में नया एंटी-पेपर लीक बिल पेश, जितेंद्र सिंह का बड़ा बयान

लोकसभा में नए एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं होने देगी। यह नया ऐतिहासिक कानून पेपर लीक और परीक्षा में धांधली रोकने के लिए लाया गया है, जिससे दोषियों को कड़ी सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

Anti Paper Leak Bill

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 28, 2026

Anti Paper Leak Bill: संसद के निचले सदन लोकसभा में बहुप्रतीक्षित नए एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पर मंगलवार (28 जुलाई 2026) को औपचारिक रूप से चर्चा की शुरुआत हो गई है। सरकार की तरफ से चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में जोरदार पक्ष रखते हुए कहा कि देश में परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक जैसी घटनाएं पहले भी हुआ करती थी, लेकिन पिछली सरकारों के कार्यकाल में ठोस और निर्णायक कार्रवाई का अभाव था।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार देश के करोड़ों मेधावी युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अब किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने देगी। केंद्रीय मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि यह समस्या किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय चुनौती बन चुकी है, जिस पर प्रभावी और कठोर लगाम कसने के लिए ही मोदी सरकार यह ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होने वाला बिल लेकर आई है।

“यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला और ऐतिहासिक कानून है”

सदन में विधेयक के प्रावधानों को रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नया विधेयक, जिसे हाल ही में प्रस्तुत किया गया था, असल में पहले से देश में लागू ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ का ही संशोधित और उन्नत रूप है। यह मूल कानून भी इसी सरकार द्वारा देश के विधायी इतिहास में पहली बार लाया गया था।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि पुराना कानून और आज प्रस्तुत किया गया यह नया संशोधन दोनों इस बात की पुख्ता गवाही देते हैं कि वर्तमान सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की रक्षा के लिए कितनी संजीदा है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस अटूट संकल्प को दोहराता है जिसके तहत युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसे भारतीय संसद के विधायी इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर कहा जा सकता है।

2009 के रेलवे और 2011 के एआईईईई समेत पुराने घोटालों का दिया हवाला

विपक्ष को आईना दिखाते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पिछली सरकारों के दौर की कई बड़ी धांधलियों और घोटालों का कच्चा-चिठ्ठा सदन के पटल पर रख दिया। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड, 2011 में ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन (AIEEE), 2012 में एम्स नई दिल्ली की प्रवेश परीक्षा और 2013 की महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा में पेपर लीक के बड़े मामले सामने आए थे। इसके अलावा उन्होंने 2010 की यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा, 2012 के टीएनपीएससी (TNPSC) और 2009 की पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा का भी जिक्र किया।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि वे इन सभी पुरानी घटनाओं की पूरी फेहरिस्त गिनाने बैठ जाएं, तो विधेयक पर सार्थक चर्चा करने के लिए सदन का समय ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इन्हीं गंभीर और बार-बार होने वाली गड़बड़ियों को देखकर सरकार ने एक समर्पित कानून की आवश्यकता महसूस की।

देश में चार प्रमुख भर्ती एजेंसियों और NTA के गठन का किया जिक्र

अपने संबोधन के आखिर में केंद्रीय मंत्री ने देश की प्रमुख भर्ती प्रणालियों का जिक्र करते हुए बताया कि केंद्र सरकार के तहत यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी और आईबीपीएस जैसी चार बड़ी एजेंसियां काम करती हैं, जबकि उच्च शिक्षा के लिए एनटीए (NTA) एक मुख्य एजेंसी है। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि साल 1992 में पहली बार कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी बनाने की सिफारिश मिली थी, और फिर 2010 में यूपीए कार्यकाल के दौरान भी एक समिति ने यही सुझाव दिया था, लेकिन किन्हीं राजनीतिक स्वार्थों के चलते उस पर कभी कोई अमल नहीं हुआ। मंत्री ने विपक्ष से दो टूक कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करनी चाहिए जिन्होंने उस अधूरे काम को पूरा किया जिसे पिछली सरकारों को बहुत पहले कर देना चाहिए था।