Anna Hazare Statement: धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद अन्ना हजारे का बड़ा संदेश, बोले- 22 अनशन से बने 10 कानून

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का बयान सुर्खियों में है। उन्होंने कहा कि 22 अनशनों से 10 कानून बने, जिससे जनआंदोलनों की ताकत का संदेश मिलता है। आखिर उन्होंने यह बात किस संदर्भ में कही और इसका मौजूदा घटनाक्रम से क्या संबंध है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

अन्ना हजारे

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 26, 2026

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Anna Hazare Statement:  केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अचानक अपने पद से इस्तीफा देने के बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है और राजनीति का पारा चरम पर पहुंच गया है। इस बीच, देश भर में चल रहे गरमागरम माहौल के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आखिरकार छात्र आंदोलन को पूरी तरह से समाप्त करने का बड़ा ऐलान कर दिया है। शनिवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल और सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का एक और दौर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण बातचीत में केंद्र सरकार ने सीजेपी की अधिकांश प्रमुख और जायज मांगों पर सहमति जताते हुए उन्हें मान लिया है।

सरकार के साथ बनी इस सकारात्मक सहमति के बाद आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरभ दास ने आंदोलन को आधिकारिक रूप से वापस लेने की घोषणा की और देश भर के सभी छात्र-छात्राओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपने-अपने घरों को लौटने का विनम्र आग्रह किया।

अन्ना हजारे ने दी शांति की सलाह और साझा किए अपने अनुभव

शिक्षा मंत्री के इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे और छात्र आंदोलन के आखिरकार खत्म होने पर देश की कई दिग्गज और प्रमुख हस्तियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। देश के जाने-माने वरिष्ठ समाजसेवक अन्ना हजारे ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सभी को शांति और संयम का कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के सामने आने वाली किसी भी समस्या या विवाद का हल कभी भी हिंसा के रास्ते से नहीं निकल सकता है। अन्ना हजारे ने अपने लंबे जीवन के संघर्षों को याद करते हुए साझा किया कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में कुल 22 बार अनशन किया, लेकिन उन्होंने कभी भी और किसी भी परिस्थिति में हिंसा का दामन नहीं थामा। इसी अहिंसक और अनुशासित संघर्ष के परिणाम स्वरूप देश में 10 बड़े और ऐतिहासिक कानूनों का निर्माण संभव हो सका, जो लोकतंत्र की असली ताकत को दर्शाता है।

अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक ने की युवाओं के संघर्ष की सराहना

दूसरी तरफ, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश भर के युवाओं और छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए एक जोशीला बयान दिया। उन्होंने कहा, “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” अभिजीत ने जोर देकर कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि हमारे देश में लोकतंत्र पूरी तरह जीवित है और भारत के युवाओं ने यह दिखा दिया है कि संगठित जनशक्ति के आगे अंततः किसी भी मजबूत सरकार को झुकना ही पड़ता है।

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इसके अलावा, देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद और सामाजिक एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र और केंद्र सरकार के इस सकारात्मक रुख का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने इसे भारत के जीवंत और मजबूत लोकतंत्र की एक बड़ी जीत करार देते हुए कहा कि देश के युवाओं ने जिस अत्यंत शांतिपूर्ण, अनुशासित और बौद्धिक तरीके से अपनी जायज मांगों को सरकार के सामने रखा, वह वास्तव में हर नागरिक के लिए काबिले-तारीफ है।

राहुल गांधी ने सरकार को घेरा और व्यवस्थागत सुधार पर दिया जोर

इसी बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे देश के युवाओं के लंबे और कठिन संघर्ष का एक सुखद परिणाम बताया। हालांकि, राहुल गांधी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा निशाना साधते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान तो केवल एक चेहरा भर थे, जो हमारी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी और खोखली होती शिक्षा प्रणाली को बाखूबी दर्शा रहे थे। कांग्रेस नेता के अनुसार, केवल किसी एक मंत्री का इस्तीफा दे देना ही इस समस्या का अंतिम समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि असली और सबसे बड़ी चुनौती आज उस पूरी व्यवस्था में बुनियादी सुधार करने की है, जिसने दीमक की तरह हमारी दशकों पुरानी शिक्षा प्रणाली को अंदर से खोखला कर दिया है। उन्होंने मांग की कि सरकार को शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए बिना किसी देरी के गंभीर और ठोस कदम उठाने चाहिए।

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