Ankit Sharma Murder Case : फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के अनुसार ताहिर हुसैन के अलावा अदनान, जावेद, नाज़िम और कासिम को भी आजीवन कारावास की सजा दी गई है। यह फैसला लंबे समय तक चली सुनवाई और साक्ष्यों की जांच के बाद सुनाया गया।
पहले ही दोषी ठहरा चुकी थी अदालत
इससे पहले कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) प्रवीण कुमार ने मामले की सुनवाई के दौरान ताहिर हुसैन और अन्य चार आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा। इसके बाद अदालत ने सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम फैसला सुनाया।
इन धाराओं के तहत हुई सजा
अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराया। इनमें धारा 302 (हत्या), धारा 188, धारा 153, धारा 153A, धारा 147, धारा 149 और धारा 365 शामिल हैं। इन धाराओं में हत्या, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और अपहरण जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। अदालत ने अन्य दोषियों को भी उनके खिलाफ सिद्ध आरोपों के आधार पर सजा सुनाई।
13 जुलाई को आया था दोषसिद्धि का फैसला
इस मामले में 13 जुलाई को अदालत ने अपना दोषसिद्धि संबंधी आदेश सुनाया था। उस समय अदालत ने ताहिर हुसैन, नाज़िम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी करार दिया था। वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए छह अन्य लोगों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। दोषसिद्धि के बाद अदालत ने सजा तय करने के लिए अलग से सुनवाई की थी, जिसके बाद अब अंतिम निर्णय सुनाया गया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सजा सुनाते समय अदालत ने घटना की गंभीरता पर कड़ी टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बेहद क्रूर तरीके से हत्या की गई। अदालत के अनुसार, पीड़ित के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और हत्या के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया। अदालत ने इस घटना को अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर सजा आवश्यक है।
सजा कम करने की मांग हुई खारिज
सजा पर बहस के दौरान दोषियों की ओर से अदालत से नरमी बरतने की अपील की गई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोषियों के परिवार पूरी तरह उन पर आश्रित हैं, इसलिए सजा कम की जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए केवल पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर सजा में कमी नहीं की जा सकती।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया फैसला
यह मामला फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी सबसे चर्चित घटनाओं में से एक रहा है। कई वर्षों तक चली जांच, गवाहों की गवाही और कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ अंकित शर्मा हत्या मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि, दोषियों के पास उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देने का कानूनी अधिकार उपलब्ध रहेगा।
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