Andhra Pradesh Liquor Scam: आंध्र प्रदेश में कथित शराब टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने रविवार को YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के नेता और राज्य के पूर्व मंत्री करुमुरी नागेश्वर राव को हैदराबाद के कोंडापुर से गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद मामले में जांच और तेज होने की संभावना है। ईडी कथित तौर पर शराब आपूर्ति से जुड़े टेंडर, पैसों के लेनदेन और कथित रिश्वतखोरी के नेटवर्क की जांच कर रही है।
मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां
ईडी इस मामले में इससे पहले तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें करुमुरी नागेश्वर राव के बेटे करुमुरी सुनील कुमार, आंध्र प्रदेश बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (APBCL) के पूर्व प्रबंध निदेशक वासुदेव रेड्डी और राज केसी रेड्डी शामिल हैं। अब पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी कथित सिंडिकेट और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है।
सिग्मा कंपनी को लेकर जांच में बड़ा दावा
जांच एजेंसियों को संदेह है कि शराब परिवहन से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में दिल्ली स्थित ‘सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस’ का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इस कंपनी के जरिए कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क को संचालित किया गया। ईडी ने इस मामले में हवाला लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच भी तेज कर दी है, ताकि कथित तौर पर रिश्वत और अवैध धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके।
शराब आपूर्ति के नाम पर कथित कमीशनखोरी
जांच के दौरान सामने आए आरोपों के अनुसार, YSRCP से जुड़े कुछ लोगों ने शराब की आपूर्ति के आदेश जारी करने के बदले कथित तौर पर रिश्वत हासिल की। आरोप यह भी है कि शराब डिपो से सरकारी दुकानों तक शराब पहुंचाने की प्रक्रिया में भी अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और अवैध धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
कई जिलों में कथित तौर पर फैला था नेटवर्क
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कथित रैकेट का नेटवर्क आंध्र प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने अलग-अलग जिलों में बारी-बारी से कथित तौर पर अवैध रकम हासिल की। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ मामलों में कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जबकि अन्य मामलों में परिचितों या रिश्तेदारों के नाम पर संस्थाओं को कथित तौर पर सामने रखा गया।
सरकार को 195 करोड़ रुपये से अधिक नुकसान का दावा
ED और CID की जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर एजेंसियों ने कथित वित्तीय नुकसान का अनुमान लगाया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ‘सिग्मा’ के नाम पर काम कर रहे कथित सिंडिकेट की गतिविधियों से सरकारी खजाने को लगभग 195.33 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियां इस रकम के स्रोत, प्रवाह और लाभार्थियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
टेंडर की शर्तों में बदलाव का भी आरोप
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि मुख्य परिवहन अनुबंध सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस को दिलाने के लिए टेंडर की कुछ शर्तों में कथित बदलाव किए गए। आरोपों के अनुसार, अनुबंध की अवधि को भी आगे बढ़ाया गया था। एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि इन बदलावों का उद्देश्य किसे लाभ पहुंचाना था और पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
सिग्मा को कथित तौर पर मिला सिर्फ चार प्रतिशत हिस्सा
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि परिवहन के माध्यम से प्राप्त रकम का बड़ा हिस्सा कथित सिंडिकेट से जुड़े खातों में पहुंचा। जांच एजेंसी के अनुसार, कुल रकम का लगभग 95 से 96 प्रतिशत हिस्सा कथित नेटवर्क के खातों में गया, जबकि करीब 4 प्रतिशत हिस्सा सिग्मा को मिला। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
CID ने घोटाले का अनुमान और बड़ा बताया
इस मामले में CID के शुरुआती अनुमान के अनुसार कथित शराब टेंडर घोटाले की राशि करीब 200 करोड़ से 400 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। वहीं, ईडी अब मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से मामले की जांच कर रही है। एजेंसी कथित अवैध धन को वैध दिखाने के तरीकों, बैंक खातों और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
जांच आगे बढ़ने के साथ बढ़ सकती हैं मुश्किलें
करुमुरी नागेश्वर राव की गिरफ्तारी के बाद मामले में राजनीतिक और वित्तीय दोनों पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। ईडी अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए कथित नेटवर्क की पूरी संरचना और पैसों के लेनदेन का पता लगाने की कोशिश करेगी। फिलहाल एजेंसी की जांच जारी है और कथित घोटाले में आगे और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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