POK Crisis : पीओके में अवामी एक्शन कमेटी का समानांतर सिस्टम ऐलान, पाकिस्तान सरकार पर बढ़ा दबाव

पीओके में 76 दिनों से जारी आंदोलन अब नए चरण में पहुंच गया है। अवामी एक्शन कमेटी ने समानांतर गांव स्तरीय निकाय और रक्षा समितियां बनाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही सरकारी संस्थानों के बहिष्कार की अपील भी की गई है। लगातार बढ़ते विरोध के बीच पाकिस्तान सरकार पर बातचीत और समाधान का दबाव बढ़ रहा है।

POK Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 23, 2026

POK Crisis : पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार, 23 अगस्त 2026 को आंदोलन के 76वें दिन अवामी एक्शन कमेटी ने एक बड़ा ऐलान किया। संगठन ने क्षेत्र में एक समानांतर व्यवस्था खड़ी करने की घोषणा की है। इसके तहत पीओके के प्रत्येक गांव में राजनीतिक, वित्तीय और रक्षा समितियां गठित करने की बात कही गई है। संगठन का दावा है कि इन समितियों के जरिए स्थानीय स्तर पर कई मामलों का संचालन किया जाएगा।

गांव-गांव बनाई जाएंगी तीन तरह की समितियां

अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमान खान ने कहा कि रावलाकोट से जारी होने वाले निर्देशों का पालन इन समितियों के माध्यम से किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में राजनीतिक समिति स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों, वित्तीय समिति आर्थिक मामलों और रक्षा समिति सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करेगी। रक्षा समिति के ऐलान को आंदोलन का सबसे अहम और संवेदनशील हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इससे आंदोलन के भविष्य की रणनीति को लेकर नए सवाल उठे हैं।

अमान खान आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल

सरदार अमान खान अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वह जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से भी जुड़े रहे हैं। इसी वजह से उनके बयान और मौजूदा आंदोलन में उनकी भूमिका पर विशेष नजर रखी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, गांवों में रक्षा समितियों का गठन केवल प्रशासनिक ढांचे के रूप में किया जाता है या आगे चलकर इसका कोई दूसरा स्वरूप सामने आता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

मुजफ्फराबाद मार्च को लेकर बढ़ा तनाव

पीओके में प्रदर्शनकारी कई बार राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने का प्रयास कर चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जून से अगस्त के बीच कई मौकों पर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उनके खिलाफ बल प्रयोग किया गया और बड़ी संख्या में लोग घायल तथा मारे गए। इंटरनेट सेवाओं पर रोक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर नाराजगी बनी हुई है।

पाकिस्तान ने बढ़ाई सुरक्षा बलों की तैनाती

आंदोलन के बीच पीओके में पाकिस्तान की अर्धसैनिक और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अतिरिक्त जवानों को इलाके में भेजा जा रहा है। 21 अगस्त को पलंदरी की ओर जा रही सुरक्षा बलों की एक टुकड़ी को स्थानीय लोगों द्वारा रास्ते में रोकने का दावा भी किया गया। इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई और एफआईआर की जानकारी सामने आई।

राशन संकट को लेकर भी प्रदर्शनकारियों का आक्रोश

अवामी एक्शन कमेटी ने क्षेत्र में राशन की आपूर्ति बहाल करने की मांग को लेकर आगे मार्च निकालने की बात कही है। अमान खान ने कहा कि आंदोलनकारी अपने अधिकारों की मांग से पीछे नहीं हटेंगे। उनका आरोप है कि लंबे समय से जारी बंद और प्रशासनिक संकट ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार पर क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

सरकारी संस्थानों के बहिष्कार का ऐलान

आंदोलनकारियों ने सरकारी तंत्र के बहिष्कार की रणनीति भी घोषित की है। अमान खान के अनुसार, लोग सरकारी कार्यालयों में जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर अपने विवाद और समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करेंगे। दुकानों को सप्ताह में निर्धारित दिनों और समय पर खोलने की अनुमति देने की बात कही गई है, जबकि स्कूलों के बहिष्कार को जारी रखने का ऐलान किया गया है।

अधिकारियों पर भी प्रदर्शनकारियों ने साधा निशाना

अमान खान ने पीओके के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बयान तो देता है, लेकिन आम लोगों की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से फैसले लेने की अनुमति नहीं है। आंदोलनकारियों का दावा है कि उनके समर्थकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जा रही है।

चुनाव प्रक्रिया पर भी उठाए गए सवाल

पीओके में हालिया चुनाव को लेकर भी अवामी एक्शन कमेटी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 45 विधानसभा सीटों में से 38 पर मतदान कराया गया। चुनाव परिणामों में पीएमएल-एन को 25 सीटें, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को 12 सीटें और जम्मू-कश्मीर अवामी दस्त-ओ-बाजू को एक सीट मिलने की जानकारी दी गई है। बाकी सात सीटों पर सुरक्षा कारणों से मतदान नहीं होने की बात सामने आई है।

मतदान प्रतिशत को लेकर अलग-अलग दावे

चुनाव में मतदान प्रतिशत को लेकर भी विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। पीओके चुनाव आयोग की ओर से लगभग 38 प्रतिशत मतदान का दावा किया गया, जबकि अमान खान ने मतदान प्रतिशत काफी कम रहने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने कई मतदान केंद्रों पर कथित बहिष्कार और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी बताए जाने पर पलटवार

पाकिस्तान की ओर से आंदोलनकारियों पर अलगाववादी गतिविधियों और अन्य आरोप लगाए जाने के बीच अमान खान ने सरकार और सुरक्षा बलों पर ही गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग करने वाले लोगों को आतंकवादी कहना उचित नहीं है। उन्होंने पीओके की बिजली, परिवहन और सरकारी सुविधाओं की स्थिति का उदाहरण देते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाया।

अगला मुजफ्फराबाद मार्च कितना अहम होगा?

रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर प्रस्तावित अगले मार्च को आंदोलन की अगली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। अमान खान ने दावा किया कि इस बार महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने सरकारी और सैन्य अधिकारियों के आवासों के घेराव की भी चेतावनी दी। हालांकि, ऐसे बयानों से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

बिजली बिल और टैक्स नहीं देने की चेतावनी

अवामी एक्शन कमेटी ने आंदोलन जारी रहने तक बिजली बिल और टैक्स का भुगतान नहीं करने का आह्वान भी किया है। अमान खान ने पाकिस्तान की ओर से पीओके को दिए जाने वाले बजट और खर्च को लेकर सरकार से हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों को अपने संसाधनों और अधिकारों पर निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए।

सरकार समर्थकों के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान

आंदोलनकारियों ने पाकिस्तान सरकार का समर्थन करने वाले स्थानीय लोगों के सामाजिक बहिष्कार की भी घोषणा की है। अमान खान ने कहा कि ऐसे लोगों के साथ सामाजिक और पारिवारिक संबंध समाप्त किए जाएंगे। इस ऐलान ने आंदोलन को राजनीतिक विरोध से आगे सामाजिक टकराव की दिशा में ले जाने को लेकर भी चिंता पैदा की है।

पीओके संकट का अगला चरण क्या होगा?

पीओके में जारी आंदोलन अब केवल प्रशासनिक मांगों तक सीमित नहीं दिख रहा है। समानांतर समितियों का गठन, सरकारी संस्थानों के बहिष्कार, टैक्स और बिजली बिल नहीं देने का आह्वान तथा मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी ने पाकिस्तान सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। दूसरी ओर, सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी से टकराव की आशंका भी बनी हुई है। आने वाले दिनों में अवामी एक्शन कमेटी की प्रस्तावित रणनीति और सरकार की प्रतिक्रिया से यह तय होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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