Amit Shah Video Case: सोशल मीडिया पर नफरत फैलाना पड़ेगा महंगा? अमित शाह मामले में BNS की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो शेयर करने के मामले में लद्दाख पुलिस ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर योगेश परमार के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने BNS की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए आगे की जांच के लिए मामला कर्नाटक के मैसूर ट्रांसफर कर दिया है।

Amit Shah Video Case

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 2, 2026

Amit Shah Video Case: देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक और अपमानजनक वीडियो शेयर किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। लद्दाख पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित और सख्त कार्रवाई की है और इस संबंध में एक जीरो एफआईआर दर्ज कर ली है। यह पूरा मामला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर योगेश परमार के खिलाफ लेह पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। पुलिस को दी गई आधिकारिक शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने फेसबुक प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो लिंक शेयर किया था, जिसमें देश के गृह मंत्री के खिलाफ नफरत से भरे और बेहद आपत्तिजनक बयान दिए गए थे। वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया।

शांति और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोपी योगेश परमार पर समाज की शांति और कानून व्यवस्था को भंग करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इस तरह के आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करने से आम जनता के बीच भारी गुस्सा और रोष फैल सकता है। यह कृत्य समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच आपसी नफरत, वैमनस्य और दुश्मनी को बढ़ावा देता है, जिससे क्षेत्र की शांति पूरी तरह से खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, ऐसे भड़काऊ बयानों से देश के सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, यही वजह है कि इस तरह के मामलों में बिना किसी ढिलाई के कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ा धाराओं के तहत केस दर्ज

इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने नए आपराधिक कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई सख्त धाराएं लगाई हैं। दर्ज एफआईआर में मुख्य रूप से धारा 197(1)(डी) यानी राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ कार्य करना, धारा 352 यानी शांति भंग करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से अपमान करना, और धारा 353(1) यानी सार्वजनिक उपद्रव या भ्रामक दुष्प्रचार फैलाना शामिल किया गया है। इन गंभीर धाराओं के तहत यदि दोष सिद्ध होता है, तो आरोपी को दो से तीन साल तक की कैद और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। चूँकि इस घटना का मूल क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) मैसूर से जुड़ा हुआ है, इसलिए आगे की निष्पक्ष जांच के लिए इस केस को कर्नाटक के देवराजा थाने में ट्रांसफर कर दिया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली एक लड़की के खिलाफ भी इसी प्रकार जीरो एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।