Modi Government: नक्सलवाद के सफाए के बाद अब केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को धता बताने वाले अवैध घुसपैठियों के खिलाफ एक बड़े और निर्णायक अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 9 जुलाई 2026 को राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य देशभर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करना और उन्हें वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया को गति देना है। सूत्रों के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं है, बल्कि घुसपैठियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ‘एक्शन प्लान’ है।
घुसपैठ के पूरे ‘इको-सिस्टम’ को ध्वस्त करने का रोडमैप
बताते चले कि, इस बैठक में केवल राज्यों की पुलिस ही नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा और खुफिया तंत्र के शीर्ष अधिकारी भी शामिल होंगे। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के प्रमुख मौजूद रहेंगे। चर्चा का केंद्र केवल सीमा प्रबंधन नहीं, बल्कि घुसपैठियों को संरक्षण देने वाले उस पूरे ‘इको-सिस्टम’ को नेस्तनाबूद करना है, जो अवैध प्रवासियों को भारत की मिट्टी पर पनाह देता है। सरकार इन नेटवर्क के जड़ तक पहुँचने के लिए एक साझा रणनीति (Unified Strategy) पर काम कर रही है।
घुसपैठियों की ‘आपूर्ति श्रृंखला’ पर बड़ा प्रहार
सरकारी खुफिया सूत्रों का स्पष्ट मानना है कि चुनौती सिर्फ सीमा पार करने की नहीं, बल्कि भीतर मौजूद उस संगठित सिंडिकेट की है, जो घुसपैठियों को फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज मुहैया कराता है। यह नेटवर्क उन्हें देश के विभिन्न औद्योगिक शहरों और राज्यों में रोजगार दिलाने में भी मदद करता है। गृह मंत्रालय अब इन मददगारों और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले रैकेट को चिन्हित कर उन पर कानूनी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर चुका है, ताकि घुसपैठ के इस धंधे को जड़ से खत्म किया जा सके।
पीएम मोदी का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से सीमावर्ती इलाकों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था। उसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। यह समिति देश के सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर महानगरों और औद्योगिक केंद्रों तक की गहन मैपिंग कर रही है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अलग-अलग राज्यों में छिटपुट कार्रवाई के बजाय, पूरे देश में एक साथ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा।
नक्सलवाद की तर्ज पर ‘मिशन घुसपैठ मुक्त भारत’
जिस प्रकार केंद्र सरकार ने समन्वित प्रयासों से देश को नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त करने में सफलता प्राप्त की है, उसी तर्ज पर अब ‘मिशन घुसपैठ मुक्त भारत’ की रणनीति तैयार की जा रही है। 9 जुलाई की बैठक के बाद यह स्पष्ट है कि अवैध प्रवासियों के लिए अब भारत की धरती पर कोई जगह नहीं होगी। यह अभियान न केवल सुरक्षा को मजबूती देगा, बल्कि उन संसाधनों को भी सुरक्षित करेगा जो अवैध घुसपैठियों के कारण आम नागरिकों से छिन रहे हैं। देश अब एक बड़े और सख्त बदलाव की दहलीज पर खड़ा है।










