Amit Shah Bengal Visit : अमित शाह ने ममता सरकार के विरुद्ध जारी किया आरोपपत्र, बंगाल चुनाव में ‘भय मुक्त’ शासन का आह्वान

बंगाल चुनाव से ठीक पहले अमित शाह का यह 'अभियोग पत्र' महज कागजों का पुलिंदा है या ममता बनर्जी के अभेद्य किले को ढहाने का ब्रह्मास्त्र? 15 साल के शासन की वे गुप्त फाइलें जो अब तक जनता से दूर थीं, शाह ने खोल दी हैं। क्या बंगाल वाकई परिवर्तन की ओर है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 28, 2026

Amit Shah Bengal Visit :  पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव का बिगुल फुकते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी आक्रामक रणनीति का आगाज कर दिया है। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के खिलाफ एक व्यापक ‘आरोपपत्र’ (चार्जशीट) जारी किया। इस दस्तावेज के जरिए भाजपा ने टीएमसी के 15 साल के शासनकाल पर तीखे प्रहार किए हैं और राज्य की वर्तमान स्थिति को “अराजकता” का प्रतीक बताया है।

14 प्रमुख बिंदुओं के जरिए भ्रष्टाचार और कुशासन पर प्रहार

भाजपा द्वारा जारी इस आरोपपत्र में कुल 14 गंभीर मुद्दों को सूचीबद्ध किया गया है। इसमें राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलताओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुखता से उठाया गया है। पार्टी ने ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी का नाम विशेष रूप से शामिल करते हुए “सिंडिकेट राज” पर हमला बोला है। इसके अलावा, राज्य में गिरते उद्योगों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को टीएमसी की बड़ी नाकामी बताया गया है।

ममता बनर्जी की विक्टिम कार्डकी राजनीति पर शाह का तंज

आरोपपत्र जारी करते हुए अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी हमेशा “विक्टिम कार्ड” खेलकर जनता की सहानुभूति बटोरने की कोशिश करती हैं, लेकिन अब बंगाल की जनता उनके इस पैंतरे को समझ चुकी है। शाह ने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने और उन्हें अपमानित करने की प्रवृत्ति की भी निंदा की, और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया।

बंगाल की संस्कृति और उपेक्षित क्षेत्रों की समस्याओं का उल्लेख

इस रिपोर्ट में केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय असंतुलन के मुद्दों को भी छुआ गया है। भाजपा ने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासन में बंगाली संस्कृति का क्षरण हुआ है और उत्तर बंगाल की लगातार उपेक्षा की गई है। चाय बागान श्रमिकों की दयनीय स्थिति, किसानों की अनसुलझी समस्याओं और कोलकाता जैसे महानगर की बुनियादी सुविधाओं के पतन को चार्जशीट में विस्तार से बताया गया है।

भय से मुक्ति” का चुनाव और जनसांख्यिकीय बदलाव की आशंका

आगामी विधानसभा चुनाव को अमित शाह ने “भय से मुक्ति” का संघर्ष करार दिया। उन्होंने एक संवेदनशील मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज बंगाल के लोगों में यह डर बैठ गया है कि वे अपनी ही जमीन पर अल्पसंख्यक न बन जाएं। शाह के अनुसार, यह चुनाव न केवल सत्ता परिवर्तन के लिए है, बल्कि टीएमसी की “अराजकता” और “भेदभाव की राजनीति” को समाप्त कर जनता को सुरक्षा का अहसास दिलाने के लिए है।

भाजपा का दावा: जनता अब बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार

अपने संबोधन के अंत में गृह मंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना की। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने बंगाल के कोने-कोने में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और उनका संदेश जन-जन तक पहुँच चुका है। शाह ने स्पष्ट किया कि यह चार्जशीट किसी राजनीतिक द्वेष का परिणाम नहीं, बल्कि पिछले 15 वर्षों के दौरान जनता द्वारा झेली गई समस्याओं का संकलन है। उनके अनुसार, बंगाल अब भय और भ्रष्टाचार के युग को समाप्त कर एक नई शुरुआत के लिए तैयार है।

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