पंजाब में जल संकट के बीच चार दोस्तों ने लगाए 1500 वर्षा जल संचयन प्लांट

जालंधर. ‘बिन पानी सब सून’, ‘पवन गुरु पानी पिता, माता धरत महत्त’ सरीखे श्लोक। जिनका जिक्र धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। यहीं प्रेरणा अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने अनुयायियों को देते है। जिसके तहत श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने प्रवचनों में बताया है कि ‘प्रकृति का सम्मान करना और उसकी रक्षा करना ही सच्ची भक्ति है’। उनकी इस सोच को शहर के चार कारोबारियों ने ना केवल जीवन में अपनाया है, बल्कि इसे मिशन बनाकर इस दिशा में कार्य कर रहे है। इसके लिए उन्होंने द वरुण मित्रा कंपनी की शुरूआत की। जिसके

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Published On :

फ़रवरी 20, 2026

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जालंधर.

‘बिन पानी सब सून’, ‘पवन गुरु पानी पिता, माता धरत महत्त’ सरीखे श्लोक। जिनका जिक्र धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। यहीं प्रेरणा अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने अनुयायियों को देते है। जिसके तहत श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने प्रवचनों में बताया है कि ‘प्रकृति का सम्मान करना और उसकी रक्षा करना ही सच्ची भक्ति है’।

उनकी इस सोच को शहर के चार कारोबारियों ने ना केवल जीवन में अपनाया है, बल्कि इसे मिशन बनाकर इस दिशा में कार्य कर रहे है। इसके लिए उन्होंने द वरुण मित्रा कंपनी की शुरूआत की। जिसके बैनर तले वैज्ञानिक तरीके से वर्षा जल संचयन प्रणालियों को डिजाइन तथा इंस्टाल किया जा रहा है। कंपनी के हर प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है। यह सफर 2012 में शुरू हुआ था। जिसके तहत 14 वर्षों में अभी तक देश भर में 1500 से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जा चुके है। यह मिशन केवल वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि श्री श्री रविशंकर जी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर दी जा रही प्रेरणा के तहत समाज को भी इन चार दोस्तों द्वारा जागरूक किया जा रहा है।

2012 में हुई थी कंपनी की शुरुआत
द वरुण मित्रा लेबर एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत 2012 में हुई थी, बाद में इसे द वरुण मित्रा कंपनी के रूप में विकसित किया गया। संस्था द्वारा लगवाए जा रहे प्लांट्स की 1500 से लेकर तीन लाख लीटर तक है, जो वर्षा के पानी को स्टोर करने और भू-जल स्तर को रिचार्ज करने में मदद करते हैं। इन प्लांट्स के जरिए अब तक करोडो़ं लीटर पानी रिचार्ज किया जा चुका है। कंपनी के संचालक रमन कुमार बठला, गुरमीत सिंह गोल्डी, राजेश शर्मा व परमवीर सिंह के मुताबिक वर्षा के पानी को जमीन के नीचे आरसीसी टैंक्स में स्टोर किया जाता है, जो 3 से 4 दिनों में स्थापित हो जाते हैं।

सामाजिक जिम्मेदारी का कर रहे निर्वाह
रमन कुमार बठला ने कहा कि उनका मकसद आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध करवाना है। जिस रफ्तार के साथ जल स्तर गिर रहा है, समाज में चेतना ना आई तो परिणाम गंभीर होने तय है। उनके सहित चारों दोस्तों का अपना-अपना कारोबार है। ऐसे में वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाना व्यावसायिक पहल नहीं सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह किया जा रहा है। पर्यावरणीय जागरूकता फैलाने के बीच बिना किसी लाभ के इस प्रोजैक्ट को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू प्रोजैक्ट में 50 हजार से लेकर एक लाख लीटर पानी की क्षमता वाले प्लांट लगाए जा रहे है। इसी तरह कमर्शियल प्रोजैक्ट में एक से तीन लाख लीटर पानी क्षमता वाले प्लांट लगाए जा रहे है।

देश के कई नामी संस्थानों में लगा चुके है प्लांट
द वरुणा मित्रा द्वारा देश के कई नामी संस्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जा चुके है। जिसमें विश्व विख्यात पवित्र धार्मिक स्थल श्री दरबार साहिब अमृतसर, पंजाब के एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ श्री, आदमपुर एयरपोर्ट, टाटा कैंसर अस्पताल मोहाली, सोनालिका कंपनी, बस स्टैंड पटियाला, जिला प्रशासकीय परिसर जालंधर, गोरखनाथ मंदिर बठिंडा सहित कई नामी जगहों पर प्लांट लगाकर ना केवल जल संरक्षण की पहल की गई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

विशेष नीति बनाए जाने की जरूरत
इस बारे में रमन कुमार बठला बताते है कि जल संरक्षण परियोजनाओं के लिए विशेष नीति बनाए जाने की जरूरत है। जिसमें सब्सिडी, टैक्स में छूट के साथ प्लांट लगवाने का प्रोत्साहन जरूरी है। जबकि, इस समय इस सामाजिक प्रोजैक्ट पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। जिसमें राहत की जरूरत है। इसके अलावा नए निर्माणों, खासकर शहरी क्षेत्रों में, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करने, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल के तहत सहयोग देना चाहिए। इसी तरह डमी प्लांट लगाकर औपचारिकता पूरी करने वाले संस्थानों की तलाश करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को एक मानिटरिंग एजेंसी बनानी चाहिए, जो प्लांट लगाने को सार्टिफाइट तो करे ही साथ ही इमारतों में लगाए जा रहे प्लांटस को सुनिश्चित किए जाने का काम भी करे। इसके अलावा सोलर की तर्ज पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने पर सब्सिडी तथा एनजीओ या कम्यूनिटी स्तर पर प्लांट लगवाने के लिए पहल किए जाने की अहम जरूरत है।

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