Ambedkar Jayanti 2026: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को मुंबई स्थित चैत्यभूमि पर पहुंचकर भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. अंबेडकर के अनुयायियों की भारी भीड़ को भीम सागर की संज्ञा दी।
उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ एक महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए आत्म-सम्मान और सामाजित जागरुकताका उत्सव है। चैत्यभूमि पर उमड़े जनसमूह को देखकर उन्होंने डॉ. अंबेडकर की व्यापर विरासत को नमन किया।
“आपकी वजह से मिट्टी सोना बन गई, भीम”
आपको बता दें कि, अपने संबोधन की शुरुआत में एकनाथ शिंदे ने भावुक होकर कहा, “आपकी वजह से मिट्टी सोना बन गई, भीम।” उन्होंने आगे कहा कि डॉ. अंबेडकर ने समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को नई दिशा दी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, अंबेडकर केवल एक विचारक नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के महान शिल्पकार थे।
संविधान निर्माण में डॉ. अंबेडकर की भूमिका
बताते चलें कि, शिंदे ने अपने भाषण में डॉ. अंबेडकर को योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय संविधान को इस तरीके से तैयार किया कि हर नागरिक को सम्मान अधिकार और न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि जब अंबेडकर ने चुनाव लड़ा था, तब उनका चुनाव चिन्ह ‘मनुष्य’ था, जो उनके मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। उनका कहना था कि बाबासाहेब ने हमेशा समानता और न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
बी. आर. अंबेडकर को उन्होंने भारतीय लोकतंत्र का आधार स्तंभ बताया और कहा कि उनके बिना आधुनिक भारत की कल्पना संभव नहीं थी।
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सामाजिक बदलाव और प्रेरणा
शिंदे ने कहा कि आज भारत जिस स्थिति में है, वह डॉ. अंबेडकर की दूरदर्शिता का परिणाम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में एक आदिवासी महिला का राष्ट्रपति बनना, किसान परिवार से आए व्यक्ति का मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री बनना—यह सब सामाजिक समानता की दिशा में बड़ी उपलब्धियां हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मसम्मान दिलाने में अंबेडकर का योगदान ऐतिहासिक है। उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं।
इंदु मिल स्मारक और विकास कार्य
अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मुंबई के इंदु मिल स्मारक का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और यह आने वाले समय में एक भव्य स्मारक के रूप में सामने आएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2047 तक भारत को मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के तहत कई विकास कार्य चल रहे हैं।
डॉ. अंबेडकर की विरासत
डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें लोग सम्मान से “बाबासाहेब” कहते हैं, भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून एवं न्याय मंत्री भी रहे। उनका जीवन सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। उनकी सोच और विचार आज भी भारत के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को दिशा देते हैं।









