Amarnath Yatra 2026: देश भर के शिव भक्तों का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। शुक्रवार, 3 जुलाई से वार्षिक अमरनाथ यात्रा की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू के आधार शिविर से रवाना होकर पहलगाम और बालटाल स्थित बेस कैंप पहुँचा, जहाँ से अब वे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पवित्र गुफा की ओर आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा को लेकर देशभर के भक्तों में अपार उत्साह और आस्था का संचार है।
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यात्रा का शुभारंभ और श्रद्धालुओं का उत्साह
अमरनाथ यात्रा के लिए प्रशासन ने मुख्य रूप से दो आधार शिविर बनाए हैं—पहलगाम का नुनवान बेस कैंप और बालटाल का डोमेल बेस कैंप। बालटाल के डोमेल बेस कैंप से तीर्थयात्रियों का पहला जत्था सुबह 4 बजे दर्शन के लिए रवाना हुआ। हालांकि, हल्की बारिश के कारण यात्रा के समय में मामूली बदलाव करना पड़ा और इसे सुबह 3 बजे के बजाय 4 बजे शुरू किया गया।
जम्मू से पहलगाम तक के पूरे सफर के दौरान श्रद्धालु ‘बम-बम भोले’ के जयघोष और भजनों में लीन रहे। भक्तों का कहना है कि वे बाबा भोलेनाथ की सेवा और दर्शन के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, और यह यात्रा उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के बाद 4,800 से अधिक श्रद्धालुओं का पहला जत्था घाटी पहुँचा। कश्मीर में प्रवेश करते ही काजीगुंड स्थित नवयुग सुरंग के पास प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने फूलों की वर्षा कर तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई गई है:
हाईवे की सुरक्षा: यात्रा के दौरान पूरे हाईवे को सुरक्षा बलों द्वारा सील किया जाता है। जत्थे के साथ सीआरपीएफ की बख्तरबंद गाड़ियां चलती हैं, जिनमें आधुनिक हथियारों से लैस कोबरा कमांडो तैनात रहते हैं।
सतर्क सुरक्षा चक्र: सुरक्षा व्यवस्था में सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान पूरी तरह मुस्तैद हैं। डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टरों के जरिए हर कदम पर गहन जांच की जा रही है।
रणनीति: सुरक्षा नियमों के तहत, हर 10 से 15 वाहनों के काफिले के बीच सीआरपीएफ का एक विशेष वाहन तैनात होता है, जो सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाता है।
प्रशासन की तैयारियाँ
बालटाल के नोडल अधिकारी राहुल यादव ने जानकारी दी कि जिला प्रशासन ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। मौसम में हल्की बूंदा-बांदी के बावजूद रास्तों को पूरी तरह साफ रखा गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग के विभिन्न स्थानों पर इमरजेंसी शेल्टर और राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं। उम्मीद है कि लगभग 10,000 श्रद्धालु प्रतिदिन इस यात्रा के लिए रवाना होंगे।










