Amarnath Yatra 2026: विलीन हुए बाबा बर्फानी, पर भक्तों के दिलों में हैं शिव; अमरनाथ में उमड़ा आस्था का सैलाब

अमरनाथ यात्रा शुरू होने के पांच दिन के भीतर प्राकृतिक हिम शिवलिंग लगभग पूरी तरह पिघल गया।

Amarnath Yatra 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 8, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Amarnath Yatra 2026: पवित्र अमरनाथ गुफा से शिव भक्तों के लिए एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ यात्रा के महज 5 दिनों के भीतर ही पवित्र हिम शिवलिंग (बाबा बर्फानी) लगभग पूरी तरह से अंतर्ध्यान (विलीन) हो गए हैं। आधिकारिक तस्वीरों के अनुसार, 6 जुलाई तक शिवलिंग का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पिघल चुका था। इसके बावजूद, श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों के साथ यात्रा बिना रुके सुचारू रूप से जारी है।

Andhra Pradesh Boat Accident: लापता 6 मछुआरों के मारे जाने की आशंका, नौसेना का सर्च ऑपरेशन बंद

तस्वीरों में देखिए कैसे कम हुई शिवलिंग की ऊंचाई

इस साल बाबा बर्फानी के आकार में तेजी से गिरावट देखी गई।

23 मई: सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा जारी तस्वीरों में हिम शिवलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी।

29 जून: यात्रा की औपचारिक शुरुआत और पहली पूजा के दिन इसकी ऊंचाई घटकर 5 फीट से कुछ ज्यादा रह गई।

6 जुलाई: यात्रा शुरू होने के मात्र 5 दिन बाद, शिवलिंग का 90% हिस्सा पिघल गया और वहां केवल एक हल्का निशान ही शेष बचा है।

यह लगातार तीसरा साल है जब यात्रा के पहले ही हफ्ते में पवित्र हिम शिवलिंग पूरी तरह पिघल गए हैं।

क्यों समय से पहले पिघल रहे हैं ‘बाबा बर्फानी’?

वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने शिवलिंग के इतनी जल्दी विलीन होने के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण बताए हैं:

ग्लोबल वार्मिंग और हीटवेव: सर्दियों के दौरान कमजोर बर्फबारी और इस साल गर्मियों में लगातार बढ़ता पारा इसका सबसे बड़ा कारण है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़: इस समय प्रतिदिन 13,000 से 20,000 श्रद्धालु पवित्र गुफा पहुंच रहे हैं।

मानवीय शरीर की गर्मी: एक बंद और सीमित गुफा के भीतर एक साथ हजारों लोगों की मौजूदगी से वहां का स्थानीय तापमान तेजी से बढ़ जाता है।

बढ़ता प्रदूषण: आसपास के ग्लेशियरों पर धूल-मिट्टी जमा होने के कारण बर्फ पिघलने की प्रक्रिया और तेज हो गई है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह शिवलिंग गुफा की छत से पानी की बूंदों के जमने से बनता है, जिसके लिए लगातार शून्य से नीचे (माइनस) तापमान की आवश्यकता होती है, जो अब मानवीय और प्राकृतिक कारणों से प्रभावित हो रहा है।

शिवलिंग विलीन, पर श्रद्धा अटूट

शिवलिंग के अदृश्य होने के बाद भी भक्तों का मानना है कि बाबा बर्फानी हर श्रद्धालु के दिल में वास करते हैं। लुधियाना से 52 लोगों के जत्थे के साथ आए राजेंद्र सिंह कालू और पंजाब के अजय गंडोत्रा ने बताया कि भले ही बाबा के दर्शन केवल एक निशान के रूप में हुए, लेकिन गुफा के भीतर कदम रखते ही जो दिव्य ऊर्जा महसूस होती है, वही उनकी यात्रा को सफल बनाती है। कुछ यात्रियों का यह भी सुझाव है कि मौसम के मिजाज को देखते हुए यात्रा को 10-15 दिन पहले शुरू किया जाना चाहिए।

3 लाख से अधिक भक्तों को अभी भी है दर्शन का इंतजार

भले ही शिवलिंग पिघल चुका हो, लेकिन अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन के लिए चुनौती कम नहीं हुई है। पहले छह दिनों में ही 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मत्था टेका है, और बुधवार तक यह आंकड़ा 1.30 लाख पार करने की उम्मीद है। इस वर्ष कुल 4 लाख लोगों ने एडवांस रजिस्ट्रेशन कराया है, जिसका सीधा मतलब है कि अभी भी 3 लाख से ज्यादा भक्तों का आना बाकी है। प्रशासन ने सुरक्षा और भारी भीड़ को देखते हुए स्पष्ट किया है कि केवल वैध रजिस्ट्रेशन वाले यात्रियों को ही नुनवान-पहलगाम (48 किमी) और बालटाल (14 किमी) के कठिन मार्गों से आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है। यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।

Nadendla Bhaskara Rao Dies : आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का निधन, राजनीतिक जगत में शोक

2