Andhra Pradesh: अमरावती अब आंध्र प्रदेश की कानूनी राजधानी, बिल लोकसभा में पारित

लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2026 पारित, अब अमरावती को कानूनी रूप से राज्य की राजधानी का दर्जा मिला। सत्तापक्ष और विपक्ष ने समर्थन दिया, सांसदों ने किसानों के मुआवजे और विकास के महत्व पर चर्चा की। यह ऐतिहासिक फैसला राज्य के लिए निर्णायक पल है।

अमरावती अब आंध्र प्रदेश की कानूनी राजधानी

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 1, 2026

Andhra Pradesh: आंध्र प्रदेश को अपनी राजधानी मिलने का लंब इंतजार खत्म हो गया है। बुधवार को लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 सर्वसम्मानित से पारित हो गया। इस बिल के पारित होने के बाद अब अमरावती को आधिकारिक रूप से आंध्र प्रदेश की राजधानी का दर्जा मिल गया है।

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बिल का पारित होना और चर्चा

आपको बता दें कि, बिल लोकसभा में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश किया गया। सदन में इसकी चर्चा करीब दो घंटे तक चली। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने इस बिल का समर्थन किया। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने इस अवसर पर कहा कि अमरावती सिर्फ एक राजधानी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आकांक्षा का प्रतीक है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विकास के लिए लोन की बजाय राज्य सरकार को स्पेशल सपोर्ट प्रदान किया जाना चाहिए।

विपक्षी दलों ने भी इस बिल का समर्थन किया और इस बात पर जोर दिया कि राजधानी बनने वाले इलाके के किसानों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए। कुल मिलाकर 13 सांसदों ने इस बिल पर चर्चा में भाग लिया।

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ध्वनिमत से पारित हुआ बिल

बिल के मतदान के समय कोई भी सांसद विरोध में नहीं था। इसके परिणामस्वरूप बिल ध्वनिमत से पारित हो गया। इससे अमरावती को कानूनी तौर पर आंध्र प्रदेश की राजधानी मान्यता प्राप्त हो गई।

चेयर पर आंध्र प्रदेश के सांसद

चेयर पर आंध्र प्रदेश के सांसद
चेयर पर आंध्र प्रदेश के सांसद

जब बिल पारित हुआ, तब चेयर पर आंध्र प्रदेश के ही सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी मौजूद थे। कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी पूर्वी गोदावरी जिले के राजोल निवासी हैं और बापटला सीट से भाजपा सांसद हैं। वे डिप्टी स्पीकर पैनल में भी शामिल हैं। इस अवसर ने आंध्र प्रदेश के लिए गर्व का पल बना दिया।

राज्य और संसद का समर्थन

इस बिल को पास कराने में राज्य विधानसभा की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। 28 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर अमरावती को राजधानी घोषित करने की मांग संसद को भेजी थी। इस प्रस्ताव को संशोधित कर संसद में पेश किया गया।

संसद में हुई चर्चा और समर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमरावती को राजधानी बनाने का निर्णय राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी सर्वसम्मति प्राप्त है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने इस मुद्दे पर सहयोग किया, जिससे राज्य की लंबी प्रतीक्षा अब पूरी हुई।