All-Party Meeting: संसद के आगामी मॉनसून सत्र, जो 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाला है, के मद्देनजर रविवार (19 जुलाई 2026) को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। सत्र के सुचारू संचालन और चर्चा के विषयों को तय करने के उद्देश्य से आयोजित यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली। हालांकि, बैठक का समापन आम सहमति के बजाय राजनीतिक खींचतान के साथ हुआ, जब विपक्षी दलों ने बैठक से बाहर निकलकर (वॉकआउट) अपना विरोध दर्ज कराया।
काकोली घोष दस्तीदार की नाराजगी
बैठक के दौरान उपजे राजनीतिक तनाव और विपक्ष के वॉकआउट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कदम को लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रतिकूल करार दिया है। काकोली घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि सर्वदलीय बैठक में शामिल होकर बीच में ही उठकर चले जाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह पीठासीन अध्यक्ष (चेयर) का भी अपमान है।
उन्होंने अपने संबोधन में जोर दिया कि इस तरह की बैठकों का मूल उद्देश्य सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित करना और सत्र के एजेंडे पर एक सहमति बनाना होता है। ऐसे में किसी भी दल द्वारा बैठक को बीच में छोड़कर जाना संसदीय शिष्टाचार के दायरे में नहीं आता। काकोली घोष ने विपक्ष को सलाह दी कि मतभेद होने के बावजूद उन्हें अपनी बात बैठक के भीतर ही रखनी चाहिए थी, न कि वॉकआउट करके संवाद के रास्ते बंद करने चाहिए थे।
NCPI के मर्जर पर स्थिति स्पष्ट की
सर्वदलीय बैठक के हंगामे के बीच, नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के मर्जर (विलय) को लेकर चल रही तकनीकी उलझनों पर भी चर्चा हुई। इस विलय को अब तक औपचारिक मान्यता न मिलने के संदर्भ में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि इस तरह के मामलों में जल्दबाजी नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि किसी भी दल या गुट के विलय के लिए एक निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया होती है।
सांसद ने आश्वस्त किया कि मान्यता से जुड़ी प्रक्रिया अपने तय नियमों के अनुरूप आगे बढ़ रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नियमानुसार इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह संकेत दिया कि पार्टी या गठबंधन से जुड़े किसी भी प्रशासनिक बदलाव को नियमों के दायरे में रहकर ही स्वीकार किया जाएगा।
मॉनसून सत्र की चुनौतियां
यह सर्वदलीय बैठक मॉनसून सत्र की तैयारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, क्योंकि इसमें सरकार और विपक्षी दल सत्र के दौरान उठाए जाने वाले ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करते हैं। हालांकि, विपक्ष के वॉकआउट ने आगामी सत्र के हंगामेदार होने के संकेत दे दिए हैं। सत्र के दौरान सरकार का प्रयास रहेगा कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जाए, वहीं विपक्ष ने अपने वॉकआउट के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार को घेरने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सोमवार से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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