Alankar Agnihotri: उत्तर प्रदेश के चर्चित पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद, उन्होंने सोमवार को धर्म नगरी वृंदावन में अपनी नई राजनीतिक पार्टी की आधिकारिक घोषणा कर दी है। प्रशासनिक सेवा की चकाचौंध को छोड़कर अब वे राजनीतिक गलियारों में अपनी किस्मत आजमाएंगे। उनकी इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है, विशेषकर युवा और शिक्षित वर्ग के बीच इस पूर्व अधिकारी के कदम को लेकर काफी चर्चा है।
‘राष्ट्रीय अधिकार पार्टी’ के साथ नए सफर का आगाज
अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का नाम “राष्ट्रीय अधिकार पार्टी” रखा है। वृंदावन में पार्टी के गठन की घोषणा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सत्ता की मलाई खाना नहीं, बल्कि आम जनता के उन अधिकारों के लिए लड़ना है, जो अक्सर कागजों और सरकारी फाइलों में दबकर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने व्यवस्था की खामियों को बहुत करीब से देखा है और अब वे राजनीति के माध्यम से उन समस्याओं का समाधान जमीन पर उतरकर करना चाहते हैं।
पार्टी की विचारधारा: अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही
राष्ट्रीय अधिकार पार्टी का मुख्य विजन आम नागरिकों के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों की रक्षा करना है। अलंकार अग्निहोत्री ने जोर दिया कि उनकी पार्टी का मुख्य एजेंडा एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने बताया कि उनकी टीम जल्द ही चुनाव आयोग से मिलकर पार्टी के पंजीकरण की आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी। आने वाले दिनों में वे पार्टी की विस्तृत नीतियों, मेनिफेस्टो और संगठनात्मक ढांचे को जनता के सामने रखेंगे।
इस्तीफा और चर्चित विवाद: सिटी मजिस्ट्रेट से राजनेता तक
अलंकार अग्निहोत्री उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के पीछे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूजीसी (UGC) के नए नियमों से जुड़े विवाद को मुख्य कारण माना गया था। उन्होंने अपने पद की गरिमा और अपने सिद्धांतों के बीच टकराव होने पर पद को त्यागना उचित समझा। इस साहसी कदम के बाद सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में उनकी काफी सराहना हुई थी, जिसके बाद से ही उनके राजनीति में आने के कयास लगाए जा रहे थे।
कठिनाइयों भरा बचपन और संघर्षों की कहानी
अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से यूपी के कानपुर (नौबस्ता क्षेत्र) के रहने वाले हैं। उनका जीवन किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। जब वे मात्र साढ़े दस साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। घर के बड़े बेटे होने के नाते पूरे परिवार (चार भाई और एक बहन) की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना हथियार बनाया।
IIT से PCS तक का मेधावी सफर
अलंकार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली रही है। उन्होंने आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) से बीटेक किया और कुछ समय तक आईटी सेक्टर की नामी कंपनियों में प्राइवेट जॉब भी की। लेकिन समाज के लिए कुछ बड़ा करने की चाह उन्हें प्रशासनिक सेवा की ओर ले आई। उन्होंने नौकरी छोड़कर यूपीपीसीएस (UPPCS) की तैयारी की और अपने पहले ही प्रयास में 15वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया। 2019 बैच के अधिकारी के तौर पर उन्होंने लखनऊ, उन्नाव और बलरामपुर में एसडीएम के पद पर कार्य कर अपनी एक ईमानदार अधिकारी की छवि बनाई।
निष्कर्ष: क्या सफल होंगे ‘मजिस्ट्रेट साहब’?
पड़ोसियों और सहकर्मियों के अनुसार अलंकार शुरू से ही शांत स्वभाव के रहे हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली हमेशा सख्त और न्यायप्रिय रही है। अब देखना यह होगा कि जो अधिकारी कभी कलम से लोगों के भाग्य का फैसला करता था, वह चुनावी मैदान में जनता का वोट हासिल करने में कितना सफल रहता है। राष्ट्रीय अधिकार पार्टी का उदय उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए और पढ़े-लिखे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
Read More : BAFTA Awards 2026: ‘बूंग’ की अंतरराष्ट्रीय कामयाबी पर ममता बनर्जी का संदेश, कही ये बात









