Bareilly Magistrate News: बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नियमों को बताया ‘काला कानून’

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों को 'काला कानून' बताते हुए और प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी पर बंधक बनाने का गंभीर आरोप भी लगाया, जिससे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

Bareilly Magistrate News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 27, 2026

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Bareilly Magistrate News: बरेली के नगर मजिस्ट्रेट (सिटी मजिस्ट्रेट) अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों और धार्मिक मामलों पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया। 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी ने यूजीसी के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुए व्यवहार को अपने इस कड़े फैसले का मुख्य कारण बताया है।

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यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर विवाद

अलंकार अग्निहोत्री ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इन नियमों को ‘काला कानून’ करार देते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर रहे हैं। इन नियमों के तहत संस्थानों को जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां और निगरानी दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसे अग्निहोत्री समाज को विभाजित करने वाली नीति मान रहे हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण

इस्तीफे के पीछे दूसरा बड़ा कारण प्रयागराज माघ मेले की घटना को बताया गया है। अग्निहोत्री ने कहा कि मौनी अमावस्या के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई बदसलूकी और मारपीट ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने प्रशासन पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तंत्र में ‘जनतंत्र’ नहीं बल्कि ‘गनतंत्र’ शेष रह गया है।

इस्तीफे के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा

सोमवार शाम को घटनाक्रम ने तब नया मोड़ ले लिया जब अग्निहोत्री ने बरेली जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मीडिया से कहा कि जिलाधिकारी आवास पर उन्हें 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के हस्तक्षेप के बाद ही वे वहां से सुरक्षित निकल पाए और अब उन्हें तत्काल सरकारी आवास खाली करने का दबाव दिया जा रहा है।

जिला प्रशासन का पलटवार

दूसरी ओर, जिलाधिकारी अविनाश सिंह और एडीएम (प्रशासन) देश दीपक सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि अग्निहोत्री स्वयं मिलने आए थे और उनके साथ सम्मानपूर्वक दोस्ताना बातचीत (Friendly Discussion) हुई थी। डीएम ने स्पष्ट किया कि वहां सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे और बंधक बनाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। अधिकारियों के अनुसार, अग्निहोत्री को मानसिक शांति के लिए छुट्टी लेने की सलाह दी गई थी।

राजनीतिक गलियारों में उबाल

इस इस्तीफे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी गर्माहट पैदा कर दी है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे प्रशासनिक दबाव और संवैधानिक असुरक्षा का संकेत बताया है। सपा नेता प्रवीण सिंह ऐरन ने इसे लोकतंत्र की आत्मा का सवाल बताया, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि भाजपा सरकार में आस्था और अभिव्यक्ति दोनों खतरे में हैं। बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम ने भी अग्निहोत्री के आवास पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

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