Akhilesh Yadav: दिल्ली में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे जाने के मामले ने अब एक बेहद संवेदनशील राजनीतिक रूप ले लिया है। सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बाद मंगलवार (21 जुलाई 2026) को देश की राजधानी में उस वक्त भारी सियासी हलचल मच गई, जब प्रधानमंत्री आवास के ठीक बाहर विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता धरने पर बैठ गए। इस हाई-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया और अखिलेश यादव को हिरासत में ले लिया। पुलिस वैन में बैठाए जाने के दौरान सपा प्रमुख ने सुरक्षाकर्मियों से बेहद चुटीले और आक्रामक अंदाज में पूछा, “पुलिस भाई, मुझे कहां ले जा रहे हो?” विपक्ष का यह संयुक्त धरना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ के बेहद करीब आयोजित किया गया था, जिसे पुलिसिया कार्रवाई के बाद फिलहाल समाप्त करा दिया गया है।
आंबेडकर विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, सरकार ने बनाया बड़ा प्लान
‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारों से गूंजा लुटियंस जोन
संसद मार्च में छात्रों पर हुए हमले से आक्रोशित कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने इस धरने के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’, ‘गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ और ‘छात्रों को न्याय दो’ जैसे तीखे नारे लगाकर माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया। इस आंदोलन में विपक्षी एकजुटता दिखाने के लिए अखिलेश यादव विशेष रूप से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ अग्रिम पंक्ति में बैठे नजर आए।
इस प्रदर्शन की सबसे खास और ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि कांग्रेस के सांसदों और बड़े नेताओं ने अपने हाथों में सांकेतिक हथकड़ियां पहन रखी थीं। विपक्ष का तर्क था कि सरकार छात्रों की आवाज को दबाकर लोकतंत्र को बंधक बना रही है, जिसके विरोध में उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया। धरना शुरू होने के कुछ ही देर बाद जब भीड़ नियंत्रित क्षेत्र की तरफ बढ़ने लगी, तो दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और शशिकांत सेंथिल समेत कई सांसदों को हिरासत में ले लिया।
गृह सचिव और केंद्रीय मंत्री ने की थी मध्यस्थता की कोशिश
पीएम आवास के बाहर चल रहे इस संवेदनशील धरने की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया था। स्थिति को संभालने और वीआईपी इलाके से जाम हटाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और नवनियुक्त केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन स्वयं मौके पर पहुंचे थे। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने सीधे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बातचीत की और उनसे सुरक्षा व्यवस्था व कानून का हवाला देते हुए धरना तुरंत खत्म करने का आग्रह किया। हालांकि, विपक्षी नेता अपनी मांगों पर अड़े रहे और प्रशासनिक अपील को ठुकराते हुए धरना जारी रखा, जिसके बाद पुलिस को बलपूर्वक उन्हें हिरासत में लेना पड़ा।
राहुल गांधी का सरकार पर सीधा निशाना
इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए देश के आम नागरिकों और युवाओं से इस धरने में बढ़-चढ़कर शामिल होने की भावुक अपील की थी। सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी ने कहा, “देश के भविष्य यानी छात्रों पर किया गया हमला, असल में हर भारतीय परिवार पर किया गया सीधा हमला है। सरकार को इस बर्बरता और प्रशासनिक नाकामी की पूरी जवाबदेही लेनी ही होगी।” राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार न तो इस गंभीर विषय पर अपनी नैतिक जवाबदेही स्वीकार करना चाहती है और न ही आगामी संसद सत्र के भीतर विपक्ष को इस पर किसी भी प्रकार की सार्थक चर्चा करने की अनुमति दे रही है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता, उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।










