UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार देर रात से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके पिता व पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ शहर के विभिन्न इलाकों में आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में दोनों नेताओं की तस्वीरों के साथ बेहद विवादित और धार्मिक वैमनस्य पैदा करने वाले शब्दों ‘दिल में बाबर, मुंह में राम’—का इस्तेमाल किया गया है। यह घटनाक्रम सामने आते ही सपाइयों में भारी आक्रोश फैल गया है।
सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का बड़ा षड्यंत्र
समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि इन पोस्टरों के पीछे एक गहरी और खतरनाक साजिश है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह केवल उनके नेतृत्व की छवि धूमिल करने का प्रयास नहीं है, बल्कि जनपद का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़कर धार्मिक उन्माद फैलाने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है। इस तरह के आपत्तिजनक बयानों और पोस्टरों के जरिए समाज में वैमनस्य पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिसे पार्टी ने बेहद गंभीरता से लिया है।
सपा कार्यकर्ताओं का सड़कों पर आक्रोश
पोस्टर लगने की सूचना मिलते ही मंगलवार सुबह से ही सपा कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। गोवर्धन चौराहे, एफसीआई गोदाम के निकट और गोवर्धन रोड सहित करीब पांच स्थानों से विवादित होर्डिंग और बैनर खुद कार्यकर्ताओं ने हटवाए। इस दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शन भी किए गए। सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी बड़ी संख्या में थाना हाईवे पहुंचे और अज्ञात तत्वों के खिलाफ नामजद तहरीर दी।
सपा नेताओं ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की
तहरीर देने वालों में प्रदेश सचिव जागेश्वर यादव, ठाकुर राघवेंद्र सिंह और प्रदीप चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। सपा नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि इस प्रकार की हरकतों से जनपद की शांति व्यवस्था को गंभीर खतरा है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों में अडिग है और ऐसी ओछी राजनीति को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने दोषियों की तत्काल पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
नगर निगम से अनुमति का जवाब तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह ने पुष्टि की कि अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि शहर में किसी भी होर्डिंग या पोल पर विज्ञापन लगाने के लिए नगर निगम से अनुमति अनिवार्य है। अब पुलिस ने नगर निगम को पत्र लिखकर पूछा है कि इन विवादास्पद पोस्टरों को लगाने की अनुमति किसने ली थी और यह किसके इशारे पर लगाए गए।










