INDIA Alliance Rally: दिल्ली की रैली में अखिलेश यादव के समर्थन में उमड़ी भीड़, सपा ने कांग्रेस को क्या संदेश दिया?

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA गठबंधन की SIR विरोधी रैली में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह चर्चा में रहा। मिंटो रोड पर अखिलेश यादव के समर्थन में नारे लगे। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है।

INDIA Alliance Rally

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

नवम्बर 2, 2026

INDIA Alliance Rally: नवंबर की पहली सुबह दिल्ली के मिंटो रोड पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का जोश देखते ही बन रहा था। हाथों में अखिलेश यादव के पोस्टर, सिर पर लाल टोपी और जुबां पर ‘अखिलेश यादव जिंदाबाद’ के नारे। सुबह से ही सपा कार्यकर्ता मिंटो रोड पर जुटने लगे थे। शुरुआत में यहां का माहौल काफी शांत था, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, कांग्रेस और सीपीआईएम समेत दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ता भी पहुंचने लगे। इसके बावजूद सपा कार्यकर्ताओं का उत्साह अलग ही नजर आ रहा था।

INDIA गठबंधन रैली में अखिलेश यादव के समर्थन में नारेबाजी

बताते चले कि, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR के विरोध में INDIA गठबंधन की रैली आयोजित की गई थी। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, टीएमसी समेत करीब 19 राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। रैली में शामिल होने के लिए विपक्षी नेता मिंटो रोड के रास्ते मार्च करते हुए रामलीला मैदान की ओर बढ़ रहे थे।

INDIA गठबंधन रैली में अखिलेश यादव के समर्थन में नारेबाजी

दोपहर करीब एक बजे जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं के साथ मिंटो रोड पहुंचे, तो वहां मौजूद सपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। लाल टोपी पहने कार्यकर्ता अखिलेश यादव की एक झलक पाने और उनसे हाथ मिलाने के लिए उत्साहित दिखाई दिए। नेताओं के काफिले में राहुल गांधी सबसे आगे थे, जबकि अखिलेश यादव और ममता बनर्जी भी खुली जीप में मौजूद थे।

‘देश का प्रधानमंत्री कैसा हो’, सपा कार्यकर्ताओं ने दिया ये जवाब

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, मार्च के दौरान एक जगह कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी शुरू हुई। आवाज आई, ‘देश का प्रधानमंत्री कैसा हो?’ इस पर वहां मौजूद सपा समर्थकों ने जवाब दिया, ‘अखिलेश भैया जैसा हो।’ यह नारा सुनकर अखिलेश यादव मुस्कुराए और हाथ उठाकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया।

रैली के दौरान सपा कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या और उनका उत्साह चर्चा का विषय बना रहा। राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस शक्ति प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा कार्यकर्ताओं की यह सक्रियता कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत के बीच अहम मानी जा सकती है। हालांकि, इसे लेकर दोनों दलों की ओर से किसी आधिकारिक राजनीतिक संदेश की पुष्टि नहीं हुई है।

यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों का पेंच

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो रही हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में साथ लड़ चुकी सपा और कांग्रेस के एक बार फिर गठबंधन में उतरने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है। हाल ही में लखनऊ में कांग्रेस से जुड़ा एक पोस्टर चर्चा में आया था। इस पोस्टर पर ‘200 सीट हक है हमारा’ लिखा था और राहुल गांधी की तस्वीर भी लगाई गई थी। इसके जरिए कांग्रेस की ओर से 200 विधानसभा सीटों पर दावेदारी का संदेश दिया गया था। हालांकि, कांग्रेस ने इस पोस्टर से खुद को अलग कर लिया था।

कांग्रेस ने सपा को सौंपी 175 से 200 सीटों की सूची

कांग्रेस ने सपा को सौंपी 175 से 200 सीटों की सूची

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कुछ समय पहले कहा था कि पार्टी की ओर से सीटों को लेकर एक सूची समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ साझा की गई है। उन्होंने बताया था कि दोनों दलों के नेता जल्द ही सीट बंटवारे पर विस्तार से बातचीत करेंगे। राजेंद्र पाल गौतम के मुताबिक, कांग्रेस ने 175 से 200 सीटों की सूची सपा के साथ साझा की है। हालांकि, उन्होंने सीटों की सटीक संख्या बताने से इनकार किया था। उनका कहना था कि दोनों दलों का नेतृत्व साथ बैठकर सीट बंटवारे की बारीकियों पर फैसला करेगा। ऐसे में साफ है कि गठबंधन की तस्वीर काफी हद तक दोनों पार्टियों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।

2022 में कांग्रेस को मिली थीं सिर्फ दो सीटें

उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2022 में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था। उस समय पार्टी की कमान प्रियंका गांधी के हाथों में थी। कांग्रेस ने अपने टिकटों में 40 फीसदी सीटें महिलाओं को दी थीं, लेकिन चुनावी नतीजे पार्टी के पक्ष में नहीं रहे। कांग्रेस सिर्फ दो सीटें जीत पाई थी और उसका वोट शेयर 2.33 फीसदी रहा था।

वहीं समाजवादी पार्टी ने 2022 के चुनाव में 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर करीब 36 फीसदी रहा था। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में कांग्रेस को सात सीटों पर जीत मिली थी।

2024 लोकसभा चुनाव में किसका कैसा रहा प्रदर्शन ?

2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की और राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं कांग्रेस ने 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसे छह सीटों पर जीत मिली थी। दूसरी ओर, बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई थी।

इस नतीजे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा-कांग्रेस गठबंधन को नई मजबूती दी। दोनों दलों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में भी दोहराने की होगी।

2027 में फिर साथ आएंगे अखिलेश यादव और राहुल गांधी?

अब सवाल यही है कि क्या 2024 की तरह 2027 के विधानसभा चुनाव में भी सपा और कांग्रेस एक साथ मैदान में उतरेंगी? दिल्ली की रैली में अखिलेश यादव के समर्थन में जुटे कार्यकर्ताओं का उत्साह गठबंधन की राजनीति के लिहाज से चर्चा में जरूर है, लेकिन चुनावी रणनीति और सीटों का बंटवारा अभी तय होना बाकी है।

2027 में फिर साथ आएंगे अखिलेश यादव और राहुल गांधी?

कांग्रेस 175 से 200 सीटों पर अपनी दावेदारी की बात कह चुकी है, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से सीटों को लेकर अंतिम सहमति सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर उत्तर प्रदेश की सियासत की नजर रहेगी। 2027 का चुनावी गठबंधन केवल साथ आने से नहीं, बल्कि सीटों और रणनीति पर सहमति बनने से तय होगा।

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