UP Politics: अखिलेश यादव का सॉफ्ट हिंदुत्व? AIMIM के तीखे हमले से मचा सियासी बवाल

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव का समर्थन करने पर अखिलेश यादव के खिलाफ AIMIM ने मोर्चा खोल दिया है। प्रवक्ता शादाब चौहान ने अखिलेश पर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' अपनाने और मुस्लिम मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 25, 2026

UP Politics: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का समर्थन करने को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अब विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए हैं। इस कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता शादाब चौहान ने अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है। शादाब चौहान का आरोप है कि अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे मोहन यादव का बचाव करके अपनी जातीय प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं, जबकि मुसलमानों के उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों पर वे हमेशा चुप्पी साधे रहते हैं।

AIMIM प्रवक्ता ने उठाए तीखे सवाल

बताते चले कि, शादाब चौहान ने अखिलेश यादव की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सपा प्रमुख की जिम्मेदारी भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों पर घेरने की थी, लेकिन वे केवल अपने ‘जातीय भाई’ को बचाने के लिए मैदान में उतरे। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे वक्फ कानून का मुद्दा हो, वंदे मातरम पर बहस हो, या कुरैशी समुदाय के कारोबार और बुनकरों की समस्या, अखिलेश यादव ने कभी मुस्लिम समाज के हक में आवाज नहीं उठाई। उन्होंने तंज कसा कि यादव समुदाय से जुड़े मामलों में वे तत्काल सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन मुसलमानों के मुद्दों पर उनकी खामोशी उनकी सोची-समझी रणनीति है।

वोट बैंक की राजनीति का पर्दाफाश

शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछले 34 वर्षों से भाजपा के नाम पर डराकर और ब्लैकमेल करके मुसलमानों का वोट हासिल करते रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा, “अब ‘वोट हमारा, राज तुम्हारा’ नहीं चलेगा।” AIMIM नेता ने दावा किया कि अब मुस्लिम समुदाय सब समझ चुका है और आने वाले चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी के साथ मजबूती से खड़ा होगा। उन्होंने सपा के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए इसे ‘PDM’ (पिछड़ा, दलित, मुस्लिम) में बदलने और बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद साझा करने की मांग की।

अखिलेश की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह

सपा के वैचारिक रुख पर हमला करते हुए AIMIM प्रवक्ता ने कहा कि अखिलेश यादव का झुकाव ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की ओर है। उन्होंने दावा किया कि सपा प्रमुख को मुसलमानों का नाम लेने में भी आपत्ति होती है और वे लगातार राम मंदिर, केदारनाथ और ‘जय परशुराम’ के नारों के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति केंद्रित कर रहे हैं। चौहान ने आरोप लगाया कि मुसलमानों से दूरी बनाना उनकी मजबूरी बन गई है क्योंकि वे बहुसंख्यक समाज को नाराज करने से डरते हैं, जो उनके कथित धर्मनिरपेक्ष होने के दावों की पोल खोलता है।

राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप

अंत में शादाब चौहान ने अखिलेश यादव को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि सपा वास्तव में न्याय करती है, तो उन्हें मुस्लिम और दलित चेहरा मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित करना चाहिए। शादाब चौहान के अनुसार, सपा सिर्फ मुसलमानों के वोट बैंक पर कब्जा रखने का षड्यंत्र रच रही है और उनका कोई भी फैसला वास्तव में अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए नहीं है। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण की ओर संकेत कर रहा है, जहाँ मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सपा और AIMIM के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है।