Akhilesh Yadav Offer: “100 विधायक लाइए, मुख्यमंत्री बन जाइए”, क्या अखिलेश सच में पलटेंगे यूपी की बाजी?

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने यूपी के दोनों डिप्टी सीएम को खुला ऑफर देकर सनसनी फैला दी है। उन्होंने कहा कि 100 विधायक साथ लाएं और मुख्यमंत्री की कुर्सी पाएं। आखिर भाजपा के भीतर चल रही किस खींचतान को अखिलेश हवा दे रहे हैं? क्या यह सिर्फ तंज है या कोई बड़ा सियासी खेल?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 22, 2026

Akhilesh Yadav Offer: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार के भीतर सेंध लगाने के लिए एक बड़ा राजनीतिक पासा फेंका है। रविवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने दोनों उपमुख्यमंत्री—केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक—को खुला प्रस्ताव देते हुए कहा कि यदि वे अपने साथ विधायकों का आवश्यक समर्थन जुटा लेते हैं, तो सपा उन्हें मुख्यमंत्री बनने में मदद करेगी।

डिप्टी सीएम के लिए “ऑफर 100”: मुख्यमंत्री बनने का खुला निमंत्रण

अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए और रणनीति के तहत कहा, “मैं पहले भी केशव प्रसाद मौर्य को यह ऑफर दे चुका हूँ और आज फिर दोहरा रहा हूँ। केशव प्रसाद मौर्य या ब्रजेश पाठक में से कोई भी अपने साथ 100 विधायक लेकर आ जाए, हम उन्हें मुख्यमंत्री बनवा देंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे बेहतर मौका उन्हें दोबारा नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि अखिलेश यादव इससे पहले भी कई बार केशव प्रसाद मौर्य को ‘बिहार के नीतीश कुमार’ जैसी भूमिका अपनाने की सलाह दे चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है जब उन्होंने ब्रजेश पाठक को भी इस समीकरण में शामिल किया है। राजनीति के गलियारों में इसे भाजपा के भीतर गुटबाजी को हवा देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

शंकराचार्य अपमान प्रकरण: सनातनी परंपराओं पर सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने केवल राजनीतिक समीकरणों पर ही बात नहीं की, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी योगी सरकार को आड़े हाथों लिया। शंकराचार्य के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जिस तरह से पूज्य संतों के साथ व्यवहार कर रही है, उसे जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हमारी सनातनी व्यवस्था में आज तक किसी भी शंकराचार्य को गंगा स्नान से नहीं रोका गया, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह अभूतपूर्व और अपमानजनक घटना हुई है। उन्होंने कहा कि जिस समय संतों का अपमान हो रहा था, उस समय ‘धर्म के रक्षक’ होने का दावा करने वाले लोग कहाँ छिपे थे?

रामभद्राचार्य और पुरानी फाइलों का जिक्र: तीखे हुए अखिलेश के तेवर

भाषण के दौरान अखिलेश यादव ने 20 साल पुराने एक मामले का उल्लेख करते हुए जगतगुरु रामभद्राचार्य पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल के दौरान रामभद्राचार्य पर धोखाधड़ी (धारा 420) का मुकदमा दर्ज था, जिसे उन्होंने उदारता दिखाते हुए वापस ले लिया था। अखिलेश ने कड़े लहजे में कहा, “शंकराचार्य को अपमानित करने के लिए किसे ढूंढकर लाया गया है? अगर यह उनका चेला है, तो मुझसे गलती हुई। मुझे उस समय मुकदमा वापस लेने के बजाय उन्हें जेल भेज देना चाहिए था।” यह बयान आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है।

भ्रष्टाचार और एआई समिट पर सवाल: “जनता बदलाव के लिए तैयार”

योगी सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए अखिलेश ने कहा कि यह सरकार अब बचने वाली नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं और ‘इन्वेस्टर समिट’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास कार्यों के नाम पर केवल भ्रष्टाचार हो रहा है। अखिलेश के अनुसार, जैसे-जैसे महंगाई और बेरोजगारी से जनता की पीड़ा बढ़ रही है, वैसे-वैसे उनका ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन और भी मजबूत होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता अब केवल चुनाव का इंतजार कर रही है ताकि वह इस सरकार को सत्ता से बाहर कर सके।

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