AISA Press Conference: SIR और वोटर लिस्ट पर घमासान, नेहा बोरा के बयान से बढ़ी सियासी चर्चा

AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने 24 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चिंता जताई। जानिए नेहा बोरा ने क्या आरोप लगाए और मतदाता सूची को लेकर जारी बहस के पीछे क्या है पूरा मामला।

AISA Press Conference

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 24, 2026

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AISA Press Conference: AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने शनिवार, 24 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और पीस बॉन्ड को लेकर सवाल उठाए। नेहा बोरा ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और उनकी लड़ाई इस अधिकार को बचाने के लिए जारी रहेगी।

SIR को लेकर मोदी सरकार पर नेहा बोरा का हमला

AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले कुछ दिनों से देशभर में SIR को लेकर विरोध देखने को मिल रहा है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR पर रोक लगाने की मांग को लेकर हुए आंदोलन का भी जिक्र किया।

SIR को लेकर मोदी सरकार पर नेहा बोरा का हमला

नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि सरकार के कदमों से लोगों के लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संगठन अपनी आवाज उठाता रहेगा। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना जनता का अधिकार है।

पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार

नेहा बोरा ने कहा कि AISA पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेगा और इस मामले को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह के बॉन्ड के जरिए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश की जाती है, तो इससे गलत संदेश जाएगा।

उन्होंने कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने का मतलब यह संदेश देना हो सकता है कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को इस तरह की शर्तों के जरिए रोका जा सकता है। नेहा बोरा के मुताबिक, संगठन इस मुद्दे को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगा और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठाता रहेगा।

नेहा बोरा ने पूछा- लोकतंत्र का मतलब क्या है?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने कहा कि लोकतंत्र को समझने के लिए आम लोगों के अधिकारों को देखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि संगठन को जो नोटिस मिला था, उसे चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया गया।

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नेहा बोरा ने पूछा- लोकतंत्र का मतलब क्या है?

नेहा बोरा ने कहा कि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ चुनाव कराना नहीं है, बल्कि नागरिकों को अपने अधिकारों के इस्तेमाल की आजादी देना भी है। उन्होंने लोकतंत्र से जुड़े दो प्रमुख पहलुओं का जिक्र किया। पहला, नागरिकों का वोट देने का अधिकार और दूसरा, अपने अधिकारों पर हमला होने की स्थिति में उसके खिलाफ आवाज उठाने की आजादी।

SIR के जरिए वोटिंग के अधिकार पर असर पड़ने का आरोप

नेहा बोरा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए आम लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने दावा किया कि करीब 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाते हैं। हालांकि, इस आंकड़े और इसके संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मतदाता सूची में नाम हटने, सत्यापन और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों को देखना अहम होगा।

चुनाव और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर AISA की चिंता

नेहा बोरा ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। अगर लोगों को वोट देने या अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में परेशानी होती है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के बजाय लोगों की बात सुनी जानी चाहिए। AISA की अध्यक्ष ने साफ किया कि संगठन पीस बॉन्ड और SIR से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखेगा।

इस पूरे मामले में अब निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी अहम होगा। SIR को लेकर उठ रहे सवालों, मतदाता सूची में बदलाव और पीस बॉन्ड की शर्तों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी हुई है।