Air India Flight Incident: चार अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान (संख्या एआई 2379) में सवार 137 यात्रियों के साथ हवा में असल में क्या हुआ था, इसका सटीक और अंतिम सच विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (AAIB) की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ पाएगा। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इस घटना को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। शुरुआती बयानों में इसे केवल खराब मौसम यानी ‘इन-फ्लाइट टर्बुलेंस’ का नतीजा बताया गया था, लेकिन तकनीकी रिपोर्ट्स और सूत्रों से सामने आ रही जानकारियां किसी बड़े सिस्टम फेलियर और तकनीकी विफलता की ओर इशारा करती हैं, जिसके कारण विमान अचानक 300 फीट नीचे आ गिरा और 17 यात्री घायल हो गए।
IIT Delhi: IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में PM मोदी का खास अंदाज, छात्रों को
हाइड्रोलिक और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी के संकेत
सूत्रों के अनुसार, विमान की ऑटोमेटेड पोस्ट-फ्लाइट मेंटेनेंस रिपोर्ट से पता चलता है कि टेकऑफ के लगभग ढाई घंटे बाद विमान के हाइड्रोलिक और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम में क्रमिक खराबी आनी शुरू हो गई थी। एअरबस ए320 नियो विमानों में तीन स्वतंत्र हाइड्रोलिक सिस्टम (लाल, नीला और हरा) होते हैं, जो ब्रेक, एलेवेटर्स और नोज़-व्हील जैसे मुख्य नियंत्रणों को पावर देते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महज एक मिनट के भीतर तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में अलग-अलग और संयुक्त रूप से नौ फाल्ट मैसेज दर्ज किए गए।
इसके तुरंत बाद ऑटोपायलट अपने आप डिस्कनेक्ट हो गया और विमान का अगला हिस्सा (नोज़) ऊपर उठने लगा, जिससे ‘स्टाल वार्निंग’ (हवा में लिफ्ट खत्म होने का खतरा) ट्रिगर हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पायलट ने मैन्युअल कंट्रोल संभालते हुए नोज़ को नीचे दबाने का प्रयास किया, जिसके चलते विमान अचानक बेहद तेज गति से 300 फीट नीचे आ गिरा और कई यात्री अपनी सीटों से उछलकर छत से जा टकराए।
शुरुआती बयान और तकनीकी रिपोर्ट में विरोधाभास
शुरुआत में एअर इंडिया ने इस घटना की वजह केवल ‘टर्बुलेंस’ को बताया था, लेकिन बाद में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बयानों से यह शब्द गायब हो गया और AAIB ने इसे ‘गंभीर घटना’ मानकर जांच शुरू कर दी। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही समय में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम का प्रभावित होना अत्यंत दुर्लभ है, जो सीधे तौर पर एअरलाइन के ग्राउंड चेक और रूटीन मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एअर इंडिया ने इस तकनीकी विफलता पर जवाब मांगने के लिए विमान निर्माता कंपनी ‘एअरबस’ को भी पत्र लिखा है।
पायलट की फिटनेस और डोप टेस्ट को लेकर उठते सवाल
इस डरावने हादसे के बाद उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के साथ-साथ कॉकपिट क्रू की शारीरिक व मानसिक फिटनेस पर भी बहस छिड़ गई है। विमान में सवार कुछ यात्रियों ने पायलट के नशे में होने या मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क न होने की आशंका जताई है, हालांकि अभी पायलट के डोप और एल्कोहल टेस्ट के अंतिम नतीजे आने बाकी हैं।
उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रोलिक फेलियर जैसी आपातकालीन और जानलेवा स्थिति में पायलट का शत-प्रतिशत मानसिक रूप से स्थिर होना ही यात्रियों की जान बचा सकता है। डीजीसीए ने वर्ष 2022 से फ्लाइट क्रू और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए रैंडम डोप टेस्ट अनिवार्य किया है। अतीत में भी कई वरिष्ठ पायलट प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में फेल हो चुके हैं। यही वजह है कि AAIB की जांच अब केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि पायलट के सेफ्टी प्रोटोकॉल और मेडिकल फिटनेस की भी गहराई से समीक्षा की जा रही है।
Delhi Rain Alert: प्रगति मैदान से छतरपुर तक झमाझम बारिश, 15 साल










